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क्या आप जानते हैं - आपका सीवर कैसे साफ़ होता है?

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क्या आप जानते हैं - आपका सीवर कैसे साफ़ होता है?

याद है ये भी कि मैं दिल्ली के सीवर कर्मचारियो पर कहानी करने के लिए निकली थी. वो एक आम सा दिन था और रेवा राम भी हर दिन की तरह अपने काम के लिए तैयार थे. पर मुझे मालूम नहीं था कि मैं जो देखने जा रही थी, वे दृश्य मुझे इतना ज़्यादा शर्मिंदा कर देगा.

रेवाराम दिल्ली के एक धनी इलाक़े मे बंद पडे एक मैन होल की सफ़ाई के लिए तैयार हुए थे. मैनहोल का ढक्कन खोलने के साथ ही भयंकर दुर्गंध से मुझे उबकाई आने लगी.

लेकिन रेवा राम के पास कोई चारा नही है सिवाए इसके कि वो इसमे नंगे बदन, बिना किसी 'मास्क' यानी नकाब के नीचे उतरे और उस कीचड को साफ़ करें.

'गैस लग गई...थोड़ा पानी चाहिए'

उन्होंने घोड़े की लगाम की तरह एक रस्सी अपने बदन पर बांधी थी जिसका एक सिरा उनके दूसरे साथियो ने बाहर से पकड रखा था.

मैनहोल का दायरा इतना छोटा था कि उसकी गंदी दीवारों से रगड़ खाकर ही रेवा राम उसमें उतर सके. दीवारों पर बडे तिलचट्टे... चारों तरफ़ ऐसी बदबू, सर चकरा देने वाली दूषित गैस थी.

मै देख पा रही थी रेवा राम आठ फ़ुट गहरे मैनहोल मे लगातार खांस रहे थे और गंदगी हाथो से निकाल, बाहर लोगों को पकडा रहे थे.

अचानक बगल के किसी आलीशान घर से किसी ने फ्लश किया होगा कि मल से भरा पानी उनके सिर पर गिरने लगा. कुछ पल मे ही वे उससे लथपथ हो गए. उनकी सांसे फूलने लगीं, आँखें जलने लगीं.. उन्हें खीच कर बाहर निकाला गया. वे खाँसते हुए कह रहे थे..... 'गैस लग गई ...थोडा सा पानी चाहिए.'

बेलदारों को सीवरों में मीथेन और हाईड्रोजन सल्फ़ाईड जैसी दूषित गैसों के संपर्क मे लगातार आना पडता है जिससे उन्हे चर्म रोग, सांस की बिमारी, सिरदर्द और लंबे समय तक चलने वाली कई तरह की बिमारियाँ हो जाती हैं डॉक्टर आशीष मित्तल

बेलदारों को सीवरों में मीथेन और हाईड्रोजन सल्फ़ाईड जैसी दूषित गैसों के संपर्क मे लगातार आना पडता है जिससे उन्हे चर्म रोग, सांस की बिमारी, सिरदर्द और लंबे समय तक चलने वाली कई तरह की बिमारियाँ हो जाती हैं

अमानवीय परिस्थितियाँ

शायद चेहरे पर पानी के छींटे पड़ते तो उन्हें बेहतर महसूस होता. उनके दोस्तों ने पड़ोस के बडे घरों के आलीशान दरवाज़ों को पीटना शुरु किया. लेकिन मुझे आश्चर्य नहीं हुआ कि दरवाज़े नही खुले. मुझे केवल शर्म आई कि ये सच मेरे सामने था...21वीं सदी की कोई आम दोपहर. कुलीनता की हिंसा क्या होती है...तब मुझे समझ में आया...

रेवा राम दिल्ली महानगर के सीवरों, मेनहाल्स की सफ़ाई करने वाले लगभग छह हज़ार बेलदारों मे से एक हैं.

पूरे भारत मे नालों, सीवरों और मेनहाल्स की सफ़ाई का ज़िम्मा इन्हीं बेलदरो पर होती है जो अमूमन दलित होते हैं.

रेवा राम सरकारी एजेंसी दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी हैं. इस शहर में लगभग छह हज़ार किलोमीटर की सीवर पाईपों की साफ़ सफ़ाई की ज़िम्मेदारी इसी सरकारी एजेंसी की होती है.

घरों के कचरे, लोगो के मल-मूत्र, कारखानों की गंदगी, ये सब इन सीवरों में बहता है और जब कचरे से ये भरने लगता है तो बेलदारों को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के इन नालों के, मेनहोल्स के भीतर जाना पडता है.

एक डाक्टर - आशीष मित्तल ने इनके स्वास्थ और सुरक्षा की चिंताओ पर शोध किया है.

उनके अनुसार, "बेलदारों को सीवरों में मीथेन और हाईड्रोजन सल्फ़ाईड जैसी दूषित गैसों के संपर्क मे लगातार आना पडता है जिससे उन्हे चर्म रोग, सांस की बिमारी, सिरदर्द और लंबे समय तक चलने वाली कई तरह की बिमारियाँ हो जाती हैं."

उनके अनुसार इन लोगों के काम करने की परिस्थितियाँ इतनी अमानवीय हैं कि उनकी उम्र औसत हिदुस्तानियों के मुकाबले में दस साल कम होती है.

क्या गुस्सा नहीं आता? नहीं मैडम. कम से कम सरकारी नौकरी है. अनपढ़ हूँ और करूँगा भी क्या? फिर हमारी जात तो सदियो से ये काम करती रही है बेलदार रेवा राम

नहीं मैडम. कम से कम सरकारी नौकरी है. अनपढ़ हूँ और करूँगा भी क्या? फिर हमारी जात तो सदियो से ये काम करती रही है

मानवाधिकार कार्यकर्ता एक सीधा सवाल पूछते हैं कि जब अरबों रुपए चंद्रयान और कामनवेल्थ गेम्स की तैयारियों पर ख़र्चे जा सकते है तो इन सीवर सिस्टम्स को पूरी तरह से मशीन से साफ़ क्यों नहीं किया जा सकता है?

'हमारी जात तो सदियों से करती आई है'

सरकार का दावा है कि बेलदार केवल आपात स्थिति मे ही इन मेनहोल्स या सीवर पाईपों की सफ़ाई करते हैं लेकिन शायद ये सच भी किसी से छिपा नहीं कि दिल्ली जैसे महानगर मे हर दिन आपात स्थिति की तरह ही होता है.

सरकारी एजेंसिया ये भी दावा करती हैं कि बेलदारो के लिए सुरक्षा के सभी उपकरण मौजूद हैं.

मैने खांसते और कीचड़ में फँसे रेवा राम से पूछा, "आपको गुस्सा नहीं आता कि ये काम आपको करना पडता है."

जवाब मिला - "नहीं मैडम. कम से कम सरकारी नौकरी है. अनपढ़ हूँ और करूँगा भी क्या? फिर हमारी जात तो सदियो से ये काम करती रही है."

मैंने इसके बाद भारतीय संविधान मे सभी नागरिको को सम्मानित जीवन जीने के अधिकार के बारे मे कोई चर्चा नही की.

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