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'राम मंदिर का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठेगा'

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'राम मंदिर का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठेगा'

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा है कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी राम मंदिर का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाएगी.

बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा "अगर केंद्र मे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार आई तो राम मंदिर मामले के निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा."

जब उनसे पूछा गया कि कल्याण सिंह और उमा भारती जो राम मंदिर आंदोलन के नायक माने जाते थे, वो पार्टी से बाहर क्यों हैं, तो उनका कहना था," ये लोग राम मंदिर मुद्दे को सत्ता में बने रहने का साधन मानते थे."

हालाँकि उन्होंने महंगाई और आतंकवाद के अलावा विकास से जुड़े मुद्दे को भी चुनाव में उठाने की बात कही.

प्रधानमंत्री के दावेदार

कुछ उद्योगपतियों के ज़रिए नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उछाले जाने से राजनाथ सिंह बहुत ख़ुश नही हैं.

अगर केंद्र मे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार आई तो राम मंदिर मामले के निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा राजनाथ सिंह

अगर केंद्र मे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार आई तो राम मंदिर मामले के निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा

उन्होंने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के निर्विवाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं, और कुछ उद्योगपतियों के सुझाव पर देश नहीं चलता है.

उनका कहना था, "गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से लालकृष्ण आडवाणी के साथ हैं."

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम मे शामिल एक श्रोता के सवाल के जवाब में माना कि उत्तरप्रदेश में उनकी पार्टी के सामने संकट है.

इस संकट के लिए उन्होंने अतीत मे बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाने को ज़िम्मेदार माना. उनका कहना था कि पार्टी भविष्य मे कभी ये भूल नहीं दोहराएगी.

उन्होंने आतंकवाद को चुनावी मुद्दा बनाए जाने पर कहा कि वो मानते हैं कि उनकी पार्टी की सत्ता के दौरान भी चरमपंथी घटनाएं हुईं थीं, पर उन्होंने दावा किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने कारगर क़दम उठाए थे.

कंधार ले जाकर 'आतंकवादियों' को छोड़ने के मुद्दे पर उनका कहना था, " वो एक आपातकाल में उठाया क़दम था जिसे नैतिकता के पैमाने पर नहीं तौला जाना चाहिए."

उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर 'आतंकवाद' के प्रति नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने का मौक़ा गंवा दिया.

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने ये कह कर कि पाकिस्तान ख़ुद भी 'आतंकवाद' का शिकार है, अंतराराष्ट्रीय दबाव से पाकिस्तान को मुक्त होने का अवसर दे दिया.

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