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'हमले भारत की प्रगति में बाधा का प्रयास'

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pratibha patil

भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मुंबई हमले भारत की आर्थिक प्रगति को धीमा करने के लिए किए गए और ये भारतीय मूल्यों पर आघात हैं.

वर्तमान लोक सभा के आख़िरी सत्र को संबोधित करते हुए प्रतिभा पाटिल ने कहा,'' मुंबई और दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, जयपुर, बंगलौर और असम की घटनाएँ और उसके पहले हमारे काबुल दूतावास में पर हुई आतंकवादी घटनाएँ उन मूल्यों पर हमला हैं जिनके लिए ये देश जाना जाता है.''

उल्लेखनीय है कि संसद के नए सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है जिसमें वो दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से संबोधित करती हैं. इसमें सरकार की नीतियों को बताया जाता है जिस पर दोनों सदनों में चर्चा होती है.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से उपजे आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में समझ बढ़ी है.

उन्होंने कहा,'' हमारी सरकार इन हमलों के बाद मिले अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से संतुष्ट है. पाकिस्तान से उपजे आतंकवाद को लेकर इस क्षेत्र और दुनिया के लिए उत्पन्न ख़तरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में समझ बढ़ी है.''

प्रतिभा पाटिल का कहना था कि भारत को आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन सरकार ने हिंसा से लोगों को बचाने के लिए अनेक क़दम उठाए हैं जिसमें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों क़ानून में संशोधन शामिल जैस क़दम शामिल है.

उल्लेखनीय है कि उनके भाषण के साथ ही संसद का अंतिम सत्र शुरू हो गया है.

मुंबई और दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, जयपुर, बंगलौर और असम की घटनाएँ और उसके पहले हमारे काबुल दूतावास में पर हुई आतंकवादी घटनाएँ उन मूल्यों पर हमला हैं जिनके लिए ये देश जाना जाता है राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल

मुंबई और दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, जयपुर, बंगलौर और असम की घटनाएँ और उसके पहले हमारे काबुल दूतावास में पर हुई आतंकवादी घटनाएँ उन मूल्यों पर हमला हैं जिनके लिए ये देश जाना जाता है

इस सत्र में जहाँ यूपीए सरकार अपनी सफलताओं और आगामी कार्यक्रमों को सामने लाने की कोशिश करेगी वहीँ विपक्ष ज़्यादा आक्रामक होकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा.

ज़ाहिर है, राजनीतिक दलों की नज़र अब मतदाताओं की ओर है.

अगले कुछ हफ़्तों में चुनाव का मैदान खुल जाएगा इसलिए राजनीतिक दल अपने को बेहतर साबित करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ेंगे.

गुरुवार को राष्ट्रपति के भाषण से इस सत्र की शुरुआत हुई है और रेल बजट और आम बजट के साथ इसका समापन होगा.अगले कुछ महीनों के खर्च के लिए तैयार किए गए इन अंतरिम बजटों को सदन पारित करेगा.

इस सत्र के दौरान आतंकवाद, महंगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक विकास, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

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