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'पोटा हटाने का फ़ैसला सही'

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'पोटा हटाने का फ़ैसला सही'

हालांकि उच्च न्यायालय ने गोधरा कांड के पीड़ितों को इसके खिलाफ़ उच्चतम न्यायालय में अपील करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.

पोटा समीक्षा समिति की सिफ़ारिशों को गोधरा कांड के पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने समिति की सिफ़ारिशों को सही ठहराया है

बचाव पक्ष की वकील नित्या रामचंद्रन ने बताया, "पोटा समीक्षा समिति की सिफ़ारिशों को पीड़ितों ने चुनौती दी थी. हालांकि ये ट्राइब्यूनल था और ट्राइब्यूनल को पूरा अधिकार दिया जाता है, फिर भी पीड़ितों ने इस सिफ़ारिश को चुनौती दी. आख़िरकार उच्च न्यायालय ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी."

गोधरा कांड

पोटा समीक्षा समिति की सिफ़ारिशों को पीड़ितों ने चुनौती दी थी. हालांकि ये ट्राइब्यूनल था और ट्राइब्यूनल को पूरा अधिकार दिया जाता है, फिर भी पीड़ितों ने इस सिफ़ारिश को चुनौती दी. आख़िरकार उच्च न्यायालय ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी नित्या रामचंद्रन

पोटा समीक्षा समिति की सिफ़ारिशों को पीड़ितों ने चुनौती दी थी. हालांकि ये ट्राइब्यूनल था और ट्राइब्यूनल को पूरा अधिकार दिया जाता है, फिर भी पीड़ितों ने इस सिफ़ारिश को चुनौती दी. आख़िरकार उच्च न्यायालय ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी

गोधरा कांड के अभियुक्तों पर आतंक निरोधक क़ानून यानी पोटा की जांच के लिए केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय पोटा समीक्षा समिति का गठन किया था.

इस समिति ने कहा था कि गोधरा कांड के सभी 120 अभियुक्तों से पोटा हटा लेना चाहिए क्योंकि जांच में किसी आतंकवादी षड्यंत्र के सुबूत नहीं मिले.

समिति का कहना था कि गोधरा कांड ट्रेन यात्रियों और रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले वेंडरों के बीच झड़प का नतीजा था.

पोटा समीक्षा समिति ने अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुक़दमा चलाने की सिफारिश की थी.

27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक कोच में आगज़नी की गई थी जिससे 59 हिंदुओं की मौत हो गई थी. इसी कांड के बाद वहां दंगे भड़क गए थे जिसमें सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

गुजरात उच्च न्यायालय ने समीक्षा समिति की सिफ़ारिशों को हालांकि सही ठहराया है लेकिन पीड़ितों को दो हफ्ते के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील करने का मौक़ा दिया है.

अब अगर उच्चतम न्यायलय भी इसे सही ठहराता है तो अभियुक्तों पर से पोटा हटा लिया जाएगा और उन सभी पर गोधरा की सेशन कोर्ट में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत ही मुक़दमे चलाए जाएंगे.

इसके अलावा ये सभी अभियुक्त ज़मानत के भी हक़दार हो जाएंगे.

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