नीलाम होंगे बापू की चप्पलें, बर्तन

समाचार-पत्र 'टेलीग्राफ" में छपी एक खबर के मुताबिक इस नीलामी का आयोजन एंटिकोरम ऑक्सनर्स कर रहे हैं। नीलामी में गांधीजी की चप्पलें, पॉकेट घड़ी, एक कटोरा व एक प्लेट रखी जाएंगी।
इस नीलामी का सबसे बड़ा आकर्षण 1910 में निर्मित वो पॉकेट घड़ी होगी, जिसे गांधी जी हमेशा अपने साथ रखते थे। गांधीजी अपने अधिकांश चित्रों में पॉकेट घड़ी को लटकाए हुए दिखाई देते हैं। गांधी जी ने वो घड़ी आभा गांधी को दे दी थी। आभा हमेशा महात्मा गांधी के साथ रहती थीं और वर्ष 1948 में गोली लगने बाद गांधीजी आभा की बाहों में ही गिरे थे।
गांधीजी ने अपने चश्मों को एक भारतीय सेना के कर्नल एचए शीरी दीवान नवाब को देते हुए कहा था, 'इन्होंने ही आजाद भारत की मुझे दृष्टि दी है'।
गांधीजी ने अपनी चप्पलें लंदन में आयोजित गोलमेज बैठक के पहले वर्ष 1931 में एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी को दे दी थी।


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