'मैथिली' में गढ़ी जा रही कंप्यूटर भाषा

बीते दिनों पटना में फ्यूल प्रोजेक्ट के तहत मैथिली कंप्यूटरीकरण शब्दावली के मानकीकरण के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। फ्यूल (फ्रीक्वेंटनली यूज्ड एंट्रीज फार लोकलाइजेशन) एक ओपन सोर्स प्रोजेक्ट है जो विभिन्न प्लेटफार्म के लिए प्रयुक्त होने वाली कंप्यूटर शब्दावली के मानकीकरण का कार्य विभिन्न भाषाओं के लिए करती है।
इस मौके पर मैथिली के विद्वान पंडित गोविंद झा ने कहा कि हालांकि कंप्यूटिंग के लिए विशेष रूप से शब्द गढ़ने के आवश्यकता है लेकिन यदि सामान्य शब्द से काम चल जाए तो अच्छा है। मैथिली अकादमी के निदेशक रघुवीर मोची ने कहा कि जमीनी शब्द का प्रयोग होना चाहिए और मैथिली को अपना क्षेत्र विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजेश और संगीता जो काम कर रहे हैं उसके व्यापक महत्व हैं और उनके प्रभाव काफी दूरगामी होंगे।
राजेश रंजन ने कार्यक्रम के संबंध में बताया कि फ्यूल के कंप्यूटर मानकीकरण का कार्यविधि दूसरे प्रयासों से काफी भिन्न है। यह प्रोजेक्ट एक स्वैच्छिक, समुदाय आधारित प्रोजेक्ट है जो एक खुले व लोकतांत्रिक आधार पर काम करता है। यह प्रोजेक्ट कई भाषाओं के लिए काम कर रही है और अगर सामुदायिक समर्थन मिलता है तो इसकी आकांक्षा बिहार की अन्य भाषाओं में काम करने की भी है।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कंप्यूटर में बार बार प्रयोग में आने वाले 578 शब्दों पर गहन विचार किया गया और विचार करके एक मानक पर आम सहमति से पहुँचा गया। मैथिली कंप्यूटर के लिए शब्दों को गढ़ने की यह पहली कोशिश हुई है। कार्यक्रम एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट आफ सोसल स्टडीज में हुआ।
प्रोजेक्ट संयोजक राजेश रंजन ने इस मानकीरण के प्रोजेक्ट व इसके उद्देश्य के बारे में बताया। कार्यक्रम में रमानंद झा रमण, मोहन भारद्वाज, सुधीर कुमार, जयप्रकाश, राकेश रोशन, संगीता सहित कई जाने माने विद्वानों, अनुवादकों व कंप्यूटर उपयोक्ताओं ने शिरकत की।


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