पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए : भारत (राउंडअप)
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले संसद के आखिरी सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "पाकिस्तान का यह फर्ज है कि वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक और ठोस कदम उठाए।"
उन्होंने मुंबई में 26 नवंबर को हुई आतंकवादी वारदात को भारत की आर्थिक प्रगति को बाधित करने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा करार दिया। पाटिल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो से भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते में सुधार हो रहा था, पर आतंकवादी वारदातों में तेजी से माहौल खराब हो गया।
ऐसे में जब पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ पुख्ता कदम उठाने में टालमटोल कर रहा है, भारत ने उसे एक बार फिर यह याद दिलाया है कि इन तत्वों की नकेल कसना उसकी जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति ने इस मौके पर पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत के रिश्ते पर भी प्रकाश डाला। आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान सरकार के रवैये को उन्होंने चिंताजनक बताते हुए कहा, "पाकिस्तान ने भारत से वादा किया था कि वह आतंकवादियों को अपनी सरजमीं का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं करने देगा, पर इस पर वह खरा नहीं उतरा।"
उन्होंने कहा, "सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार भरपूर वित्तीय सहायता देने के लिए कटिबद्ध है। हमारे सैन्य बलों की प्रतिबद्धता, त्याग और पेशेवर रवैये की वजह से उन पर पूरे देश को नाज है। वे प्राकृतिक आपदाओं और उग्रवादी गतिविधियों से निपटने में भी प्रशासन की पूरी मदद करते हैं।"
उन्होंने अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए भी भारतीय नौसेना की सरहाना की। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने अग्नि-1, अग्नि-3 और अन्य मिसाइलों के सफल परीक्षण को भी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि करार दिया।
राष्ट्रपति ने आतंकवाद खासकर मुंबई हमले की चर्चा करते हुए कहा, "मुंबई हमले के पीछे एक ही मकसद था कि हमारी आर्थिक प्रगति को रोक दिया जाए। इस हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मिले समर्थन की वजह से मेरी सरकार उत्साहित है।"
सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "पीछे मुड़कर देखने पर हमें आशा दिखाई देती है। हम न केवल चुनौतियों का सामना कर पाए बल्कि मजबूत बनकर भी उभरे हैं। आतंकवादी हिंसा की वजह से हमारे राष्ट्र के सामने जो चुनौती खड़ी हुई है उससे मुकाबले के लिए आम लोगों ने भी एकजुटता दिखाई है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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