श्रीलंका में जारी घमासान का सबसे बुरा असर महिलाओं पर

नई दिल्ली, 12 फरवरी(आईएएनएस)। श्रीलंका के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कई महिलाएं अपनी किस्मत को कोस रही हैं। उन्हें लिट्टे और सेना के बीच जारी खूनी संघर्ष में मौत का शिकार बनने से बचने की खुशी नहीं है, बल्कि उन्हें जिंदा रहने का मलाल है। इस संघर्ष का सबसे बुरा असर महिलाओं पर ही पड़ा है।

इस संघर्ष में अपने परिजनों की मौत की त्रासदी ने उन्हें तोड़कर रख दिया है। मन्नार के इस अस्पताल का नजारा वाकई हृदय विदारक है। एक महिला युद्घ में एक पांव गंवाने वाले अपने मासूम बेटे को गोद से चिपकाकर जोर-जोर से रो रही है। ऐसे नजारे इस जंग में महिलाओं की दुर्दशा की कहानी कहते हैं।

लिट्टे के गढ़ किलीनोच्चि से भागते वक्त एक हथगोले की चपेट में यह ढाई वर्षीय बच्चा आ गया और उसका एक पांव उड़ गया। इस बदनसीब महिला की दो संतान पहले से ही गायब हैं। सुरक्षित स्थान की ओर भागते वक्त इस महिला ने अपने दो बच्चों को अपने एक परिचित को सौंप दिया था। अब उनका कोई अता-पता नहीं है। महिला के पति का भी कोई अता-पता नहीं है।

इसी तरह इस अस्पताल में एक 16 वर्षीय लड़की अपना इलाज करा रही है। वह भी जंग में बुरी तरह जख्मी होने वालों की जमात में शामिल है। मुल्लैतिवू की रहने वाली इस लड़की के दोनों पांव बमबारी में नष्ट हो गए। इसी अस्पताल में एक गर्भवती महिला जख्मी हालत में भर्ती है। किलीनोच्चि में बमबारी की चपेट में उसका आधा शरीर जख्मी हो गया। ऐसी बदनसीब महिलाओं और लड़कियों की तादाद काफी बड़ी है। कई और अस्पतालों में भी ऐसे नजारे देखे जा सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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