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कंधमाल में अभी भी 5,000 ईसाई शरणार्थी शिविरों में

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नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। उड़ीसा के कंधमाल जिले में शरणार्थी शिविरों में रहने वाले अभी भी 5,000 ईसाई खौफ के साये में हैं। सांप्रदायिक हिंसा के कारण वे इन शिविरों में शरण लेने पर मजबूर हुए।

'कटक-भुवनेश्वर आर्क डायोसेस' के विकार जनरल रेवरेंड जोसेफ कालाथिल ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "शिविरों में रहने वाले अधिकांश लोग घर लौटने से डर रहे हैं। वे खौफजदा हैं। इन लोगों का सब कुछ खत्म हो गया है। उनकी जिंदगी तबाह हो चुकी है।" शहरों में स्थित शिविरों को बंद कर दिया गया है और अब इन भुक्तभोगियों को दंगा प्रभावित गांवों के शिविरों में रहना पड़ रहा है।

जोसेफ का कहना है कि जिन ईसाइयों ने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है, उन्हें घर लौटने दिया जा रहा है। उन्होंने फोन पर इस संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि भुक्तभोगी ईसाइयों में से करीब 15 फीसदी ने धर्म परिवर्तन कर लिया है। धर्म परिवर्तन की शर्त पर उन्हें घर लौटने दिया गया है।

विश्व हिंदू परिषद(विहिप) के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के कारण कंधमाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी हुई थी। यूं तो पुलिस ने इस घटना के लिए नक्सलियों को जिम्मेवार ठहराया था, लेकिन कुछ हिंदू संगठनों ने इसके लिए ईसाई संगठनों को दोषी माना। ईसाई विरोधी दंगे के कारण हजारों लोग बेघर हुए और कम से कम 38 लोग मारे गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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