इसराइली में मतदान ख़त्म

चुनावों में मुख्य संघर्ष बेन्यामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी और ज़िपी लिवनी के नेतृत्व में मध्यमार्गी माने जाने वाली कदीमा पार्टी के बीच है. कई अन्य दल भी मैदान में हैं.
इसराइल की चुनावी प्रक्रिया में बहुमत पाने के लिए किसी भी दल को 61 सीटों की ज़रूरत होती है लेकिन इसराइल में सदा गठबंधन सरकारें ही सत्ता में रही हैं क्योंकि कभी कोई एक पार्टी 61 सीटें नहीं जीत पाई है.
सबसे ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी को गठबंधन सरकार बनाने का अवसर मिलता है.
सर्वेक्षणों में काँटे की टक्कर
सर्वेक्षणों से संकेत मिले हैं कि लिकुद और कदीमा के बीच कांटे की टक्कर है.
ये संकेत भी मिले हैं कि घोर दक्षिणपंथी इसराइल अवर होम पार्टी भी ज़बरदस्त प्रदर्शन कर सकती है.
लेकिन कई इलाक़ों में भारी बारिश और तेज़ हवाओं के कारण मतदान प्रभावित हो सकता है.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव का नतीजा जो भी हो, नतीजे आने के बाद सरकार बनाने से पहले कई हफ़्ते तक बातचीत का दौर चल सकता है.
प्रधानमंत्री ओल्मर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफ़े की पेशकश की थी
भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव
वर्तमान प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कई महीने पहले भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों के कारण इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी लेकिन चुनाव कराए बिना सरकार बनाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं.
चुनाव के नतीजे आने और नई सरकार बनने तक ओल्मर्ट ही प्रधानमंत्री का सारा कार्यभार देख रहे हैं.
इसके बाद ओल्मर्ट की कदीमा पार्टी की नेता बनीं विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी, जो पार्टी का चुनावों में नेतृत्व कर रही हैं.
मौजूदा प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने लिवनी का खुलकर समर्थन किया है, "मेरे विचार से ये समय है बताने का कि इसराइली प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से और खुले तौर पर किसका समर्थन कर रहा है. ये जानकर आपको आश्चर्य नहीं होगा कि मैं कदीमा पार्टी का समर्थक हूँ. मेरी उम्मीद है कि ज़िपी लिवनी इसराइल की अगली प्रधानमंत्री होंगी."
दक्षिणपंथियों का दबदबा
बीबीसी के बेथनी बेल का कहना है कि पर्यवेक्षक मानते हैं कि यदि लिवनी के नेतृत्व में कदीमा पार्टी, बेन्यामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी से आगे निकल भी जाती है उसे गठबंधन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है.
ये जानकर आपको आश्चर्य नहीं होगा कि मैं कदीमा पार्टी का समर्थक हूँ और मुझे उम्मीद है कि ज़िपी लिवनी इसराइल की अगली प्रधानमंत्री होंगी प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट
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ऐसा इसलिए क्योंकि दक्षिणपंथी पार्टियों को संसद में काफ़ी सीटें मिल सकती हैं.
ग़ज़ा में पिछले दिनों हुए संघर्ष के बाद इसराइलियों के बीच सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन गया है. कई लोगों का कहना है कि वे शान्ति प्रक्रिया या फ़लस्तीनियों का भरोसा नहीं कर सकते.
ऐसे माहौल में राष्ट्रवादी पार्टी के नेता लिबरमैन जिस तरह अरब विरोधी भाषण दे रहे हैं उससे उनको भी लाभ हो सकता है. मतगणना के बाद गठबंधन बनाने की जटिल प्रक्रिया शुरू होगी जिसमें कई हफ़्तों तक का समय लग सकता है.


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