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इसराइल में जीत के अलग अलग दावे

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इसराइल में जीत के अलग अलग दावे

इसराइल की दोनों मुख्य पार्टियाँ लिकुद और कदीमा ने आम चुनावों में अपनी अपनी जीत का दावा किया है. लेकिन दोनों को ही गठबंधन सरकार बनानी होगी.

दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी के बेन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि चुनावों में राष्ट्रवादी पार्टियों की जीत हुई है. दूसरी ओर मध्यमार्गी कदीमा पार्टी की ज़िपी लिवनी का कहना है कि वो देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं.

मतदान बाद हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि कदीमा पार्टी 30 सीटें और लिकुद पार्टी 29 सीटें जीत सकती है. घोर दक्षिणपंथी तीसरे स्थान पर रहेंगे.

 मैं देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ   ज़िपी लिवनी, कदीमा पार्टी की नेता

 मैं देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ

सर्वेक्षणों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री एहुद बराक के नेतृत्ववाली लेबर पार्टी को चौथे स्थान पर ही संतोष करना पड़ेगा.

चुनाव के अंतिम नतीजे कुछ ही दिनों में आ जाएँगे. चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में लिकुद पार्टी को बढ़त दिखाई गई थी लेकिन अंतिम दिनों में कदीमा पार्टी ने अपनी स्थिति मजबूत की.

जैसे ही एक्जिट पोल के नतीजों की घोषणा इसराइली टीवी पर हुई कदीमा पार्टी के मुख्यालय पर खुशी की लहर दौड़ गई. कदीमा पार्टी की नेता ज़िपी लिवनी ने अपने समर्थकों से कहा,'' लोगों ने कदीमा पार्टी को चुना है.''

उन्होंने लिकुद पार्टी के नेता बेन्यामिन नेतन्याहू से अपील की कि वो उनके नेतृत्ववाली राष्ट्रीय सरकार में शामिल हों.

गठबंधन सरकार

उल्लेखनीय है कि इसराइल में नई सरकार के चयन के लिए मंगलवार को मतदान हुआ था. इसराइल की चुनावी प्रक्रिया में बहुमत पाने के लिए किसी भी दल को 61 सीटों की ज़रूरत होती है.

लेकिन इसराइल में सदा गठबंधन सरकारें ही सत्ता में रही हैं क्योंकि कभी कोई एक पार्टी 61 सीटें नहीं जीत पाई है. सर्वेक्षणों के बाद कदीमा पार्टी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई

सबसे ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी को गठबंधन सरकार बनाने का अवसर मिलता है. पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव का नतीजा जो भी हो, नतीजे आने के बाद सरकार बनाने से पहले कई हफ़्ते तक बातचीत का दौर चल सकता है.

वर्तमान प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कई महीने पहले भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों के कारण इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी लेकिन चुनाव कराए बिना सरकार बनाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं.

नई सरकार बनने तक ओल्मर्ट ही प्रधानमंत्री का सारा कार्यभार देख रहे हैं. इसके बाद ओल्मर्ट की कदीमा पार्टी की नेता बनीं विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी. वो पार्टी का चुनावों में नेतृत्व कर रही हैं.

मौजूदा प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने लिवनी का खुलकर समर्थन किया है. उनका कहना था,'' मेरी उम्मीद है कि ज़िपी लिवनी इसराइल की अगली प्रधानमंत्री होंगी."

पर्यवेक्षक मानते हैं कि यदि लिवनी के नेतृत्व में कदीमा पार्टी, बेन्यामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी से आगे निकल भी जाती है, तो भी उसे गठबंधन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि दक्षिणपंथी पार्टियों को संसद में काफ़ी सीटें मिल सकती हैं.

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