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जनजातियों का दिल जीतने में लगी है छत्तीसगढ़ पुलिस

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सुजीत कुमार

रायपुर, 11 फरवरी (आईएएनएस)। जब 45 वर्षीय घासीराम वट्टी ने अपनी झोपड़ी के बाहर एक पुलिसकर्मी को खड़ा देखा तो उनकी घबराहट चरम पर जा पहुंची। वट्टी को लगा कि पुलिस उन्हें नक्सलियों से संबंध होने के आरोप में पकड़ने आई है, लेकिन उस वक्त उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब पुलिसकर्मी ने उन्हें उपहार में मिठाई का डब्बा थमाया। यह जनजातियों का दिल जीतने का नायाब तरीका है।

गोंड जनजाति से रिश्ता रखने वाले वट्टी को पुलिसवाले ने बताया कि प्रशासन जंगल के बाशिंदों का दिल जीतना चाहता है। उसे बताया गया कि अगले दिन कोई और पुलिसकर्मी उसके किसी पड़ोसी के घर पर दस्तक देगा और उसे भी कोई नया उपहार थमाया जाएगा। जनजातियों को पुलिस प्रशासन का यह हृदय परिवर्तन हैरत में डाल रहा है। पुलिस अधिकारियों ने माओवादियों के खुफिया नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए यह तरकीब अपनाई है।

वत्ती के घर पर मिठाई के डब्बे के साथ दस्तक देने वाले पुलिसकर्मी सपन चौधरी कोई अदना सिपाही नहीं, बल्कि वह धमतारी के थाना प्रभारी हैं। वह नक्सलवाद प्रभावित कांकेर जिले में स्थित काउंटर टेरोरिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज (सीटीजेडब्ल्यूसी) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 587 पुलिसकर्मियों में से एक हैं। इस प्रशिक्षण संस्थान में नक्सलियों से निपटने के गुर सिखाए जाते हैं। पुलिसकर्मियों को छापेमारों से निपटने के लिए गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर बी़ के पोनवार कहते हैं, "यहां सिपाही से लेकर पुलिस अधीक्षक तक को प्रशिक्षित किया जा रहा है। नक्सलियों से मुकाबले के लिए स्थानीय लोगों का दिल जीतना जरूरी है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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