जन्म लेने वाले बच्चे की रक्षा सबकी जिम्मेदारी : शान्ता सिन्हा
सतना जिले के मझगवां विकास खंड में जन सुनवाई में हिस्सा लेने आईं सिन्हा का मानना है कि बच्चों की मौत चाहे कुपोषण से हुई हो अथवा किसी अन्य वजह से, लेकिन यह मौतें हमारी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर देने वाली है। उन्हें यह मानने में जरा भी हिचक नहीं है कि कुपोषण की स्थिति गंभीर है और बच्चों की असमय मौत हो रही है। उन्होंने यहां जन सुनवाई के दौरान अपने से मिलने आए विभिन्न जन संगठनों से चर्चा करते हुए कहा कि हमें बच्चों की मौत के सच को स्वीकारना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में सरकारी अमले को एक दूसरे पर दोषारोपण करने की बजाए सच को स्वीकार करके इस समस्या से निपटना चाहिए।
आयोग की कुपोषण विशेषज्ञ डॉ़ वंदना प्रसाद ने किरहाई पुखरी गांव का दौरा करने के बाद बताया कि कुपोषण को समझने के लिए किसी विषेषज्ञ की जरूरत नहीं है। बच्चों की शारीरिक हालत देखकर ही हकीकत का अंदाजा लग जाता है। यह स्थिति दुखद है कि जब तक पीड़ित बच्चा ग्रेड तीन और चार में नहीं पहुंच जाता है तब तक उसे कुपोषित नहीं माना जाता है। उन्होंने बताया कि आयोग ने किरहाई पुखरी गांव में पाया है कि वहां बड़ी तादाद में बच्चे कुपोषित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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