मोटे गुजारा भत्ते का लोभ दिल्ली में तलाक अर्जियों में इजाफे की प्रमुख वजह?
कानू सारदा
नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में तलाक के मामलों में वृद्धि के पीछे आधुनिक जीवनशैली और पेशेवर तनाव की भूमिका रही है, लेकिन कई कानून विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में मोटा गुजारा भत्ता मिलने की प्रबल गुंजाइश भी इसकी एक प्रमुख वजह है।
वैवाहिक मामलों के विशेषज्ञ और वकील आनंद शर्मा कहते हैं, "कई महिलाएं दिल्ली में तलाक का मुकदमा इसलिए लड़ती हैं, क्योंकि यहां गुजारा भत्ता मिलने की संभावना अधिक होती। दूसरे राज्यों की तुलना में दिल्ली की अदालतें गुजारा भत्ता के तौर पर अधिक मोटी रकम चुकाने का आदेश देती हैं।"
दिल्ली में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जब अदालतों ने बेरोजगार पतियों को तलाकशुदा पत्नी को गुजारा भत्ता के तौर पर प्रति महीने 30 हजार रुपये तक चुकाने का आदेश दिया। यही वजह है कि दिल्ली तलाक मामलों की राजधानी बन गई है, जहां हर साल तलाक की 8000 से 9000 अर्जियां दाखिल की जाती हैं।
मुंबई में हर साल करीब 7000 ऐसे मामले दर्ज होते हैं, जबकि चेन्नई में 5000 तलाक अर्जियां दाखिल होती हैं। पिछले साल तीसहजारी कोर्ट ने एक बेरोजगार को अपनी पूर्व पत्नी को प्रति माह 30,000 रुपए देने का आदेश दिया, जबकि सच्चाई यह है कि यह महिला खुद एक बड़ी कंपनी की उच्च पदस्थ अधिकारी हैं और उनका वेतन तब प्रति माह 100,000 रुपए था।
पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को आमदनी छिपाने का दोषी करार देते हुए उसे अपनी पूर्व पत्नी को प्रति माह 125,000 रुपए देने का आदेष दिया। इसी लोभ में कई महिलाएं दूसरे राज्यों से अपने मुकदमे को दिल्ली में स्थानांतरित करा लेती हैं।
वकील गीतांजलि गोयल एक उदाहरण पेश करते हुए कहती हैं, "मेरी एक मुवक्किल के पक्ष में मेरठ की अदालत ने फैसला सुनाया और उसके पूर्व पति को गुजारा भत्ता के तौर पर प्रति माह 500 रुपए देने का आदेश दिया। पीड़िता ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित कराया और उसे दिल्ली के जीवन यापन खर्च के मुताबिक प्रति माह 2000 रुपए का गुजारा भत्ता चुकाए जाने का आदेश दिया गया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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