भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर (राउंडअप)

विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के 12 घंटे के अति व्यस्त दौरे के दौरान दक्षिण एशिया में पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर सहमति देखने को मिली।

भारतीय सामानों के लिए सड़क व रेल यातायात का रास्ता देने के साथ ही बांग्लादेश ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी प्रदर्शन किया और घरेलू स्तर पर उत्पन्न हुए विरोध को दरकिनार कर दिया।

ज्ञात हो कि इस समझौते के माध्यम से भारत अपने पूर्वोत्तर के इलाके से जुड़ जाएगा, जो कि अभी तक देश के अन्य हिस्सों से कटा हुआ है।

विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस समझौते को राष्ट्र विरोधी करार देते हुए इसके खिलाफ आंदोलन की धमकी दी है।

व्यापारिक समझौते के तहत आवागमन के लिए किए गए इस बुनियादी समझौते जैसा एक समझौता वर्ष 2006 में बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा भी किया गया था।

ढाका अपने व्यापारिक दूरी को पाटने को लेकर चिंतित है।

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मुखर्जी ने कहा कि व्यापार में एक लंबा अंतराल भारत के पक्ष में ज्यादा रहा है, जिसे अचानक संतुलित नहीं किया जा सकता।

समझौते के बाद मुखर्जी ने कहा, "एक पूर्व विदेश व्यापार मंत्री की हैसियत से मैं आप सभी को बता सकता हूं कि ऐसी कोई कार्यप्रणाली नहीं है जिसके जरिए दो देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोनों देशों के हित में संतुलित किया जा सके।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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