सतना में कुपोषण से हुई बच्चों की मौत पर भड़का आयोग

जन सुनवाई के दौरान आयोग ने बच्चों की मौत की वजह के बदले उनकी संख्या को लेकर व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया।

सतना जिले के उचेहरा और मझगवां विकास खंड में कुपोषण के चलते हुई बच्चों की मौत का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दल ने मझगवां में जन सुनवाई आयोजित की। जन सुनवाई में पहुंचे 40 गांव के लोगों ने आयोग के सामने हकीकत बयान की।

जन सुनवाई में 44 लोगों ने बच्चों की खराब सेहत के बारे में जानकारी दी। इसमें 24 वे लोग भी शामिल थे जिनके बच्चे कुपोषण के कारण मौत के मुंह में समा चुके हैं।

दुदवारा गांव की सोनिया बाई ने बताया कि उसके दो बच्चे पहले कमजोर हुए बाद में उन्हें बीमारी ने घेर लिया। उनके इलाज के लिए उसने गहने तक बेच दिए मगर बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी।

इमलिया गांव की फुलवा बाई अपने बच्चे के साथ आई थी। बच्चे की स्थिति देख आयोग की अध्यक्ष शांता सिन्हा, सदस्य दीपा दीक्षित, सलाहकार स्वाति नारायण व कुपोषण विशेषज्ञ वंदना प्रसाद दंग रह गईं। उन्होंने बच्चे को तुरंत सतना स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजने का आदेश दे दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि बड़ी तादाद में बच्चे कुपोषण की चपेट में है। दूसरी ओर सरकारी राशन में की गई कटौती से उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। इतना ही नहीं कई लोगों के जॉब कार्ड तक नहीं बने हैं। इस कारण उन्हें काम नहीं मिल पाता।

आदिवासी अधिकार मंच के आनंद व प्रतीक ने बताया कि 10 गांव के सर्वेक्षण से पता चला है कि 127 परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं हैं। इन गांवों में 26 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित है। मझगवां के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पिछले साल 253 बच्चों की मौत हुई थी।

जन सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से कुपोषण की बात झुठलाने की कोशिशें की गईं। इस पर आयोग की अध्यक्ष ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मसला यह नहीं है कि बच्चों की मौत कुपोषण से हुई है, बल्कि मौतों की संख्या गंभीर सवाल खड़ा करने वाली है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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