भाजपा नेताओं ने पढ़ा चुनावी जीत का पाठ

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नई दिल्ली, 10 फरवरी: नागपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को चुनाव विश्लेषक जी. वी. एल. नरसिम्हा राव ने केंद्र में सत्ता में वापसी के लिए 10 सूत्रीय गुरुमंत्र दिए। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से लोकसभा चुनावों से जुड़ी मौजूदा और संभावित परिस्थितियों का तथ्यपरक आकलन करते हुए भविष्य की रणनीति के बारे में भी अपने सुझाव सामने रखे।

नागपुर में रविवार को संपन्न हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति और राष्ट्रीय परिषद की बैठक के पहले दिन एक पूरा सत्र राव को अपनी बात रखने के लिए दिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार राव की बात सुनी तो सबने ध्यान से पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव की कमान संभालने वाले भाजपा नेता इस गुरूमंत्र को कितनी तरजीह देंगे।

भारत के प्रमुख चुनाव विश्लेषकों में शुमार किए जाने वाले राव को कुछ समय पूर्व ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मीडिया सलाहकार नियुक्त किया गया है। राव भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में बतौर सदस्य भी शामिल किए जा चुके हैं।

इस बैठक में उन्होंने सकारात्मक चुनाव अभियान चलाए जाने पर जोर दिया गया। लोकसभा चुनाव की रणनीति तय करने के मकसद से हुई इस बैठक में पहुंचे नेताओं को सकारात्मक मुद्दों पर चुनाव लड़ने का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा, "अमेरिका में बराक ओबामा ने एक निर्णायक जीत इसलिए हासिल की क्योंकि उन्होंने अमेरिकी जनता में आशा व उम्मीद का संचार किया, न कि उन्होंने बुश के निराशाजनक राष्ट्रपति काल को मुद्दा बनाया। जनता सकारात्मक आश्वासन चाहती है। डर फैलाना और प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाना न सिर्फ नुकसानदायक होगा बल्कि पार्टी के दावे को कमजोर करेगा।"

उन्होंने पार्टी रणनीतिकारों को अनावश्यक मुद्दे उछालने व उसमें उलझने से बचने की सलाह दी लेकिन दिलचस्प यह रहा कि बैठक के अगले ही दिन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राम मंदिर का वर्षो पुराना विवादास्पद मुद्दा फिर से उछाल दिया।

राहुल गांधी जैसे युवा को कांग्रेस यदि भावी प्रधानमंत्री के रूप में आगामी चुनाव में पेश करती है तो इस परिस्थिति में भी वह भाजपा का लाभ देखते हैं। इस बारे में उन्होंने यह राय व्यक्त किया कि देश का युवा वर्ग इतना परिपक्व है कि राहुल के आकर्षण और आडवाणी के अनुभव में से वह अनुभव को तरजीह देगा। इसे साबित करने के लिए नरसिम्हा राव ने एक अनुसंधान का हवाला दिया।

उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों की जगह राज्य विशेष व स्थानीय मुद्दों पर जोर देने की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया, "राज्यस्तरीय व स्थानीय मुद्दे प्रभावी होते हैं। अगले आम चुनाव में भी यही होने जा रहा है। भाजपा को इससे फायदा ही होगा क्योंकि उसके पास जो-जो राज्य हैं वहां की सरकारें बहुत लोकप्रिय हैं जबकि संप्रग के साथ ऐसा नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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