हादसे की कहानी, प्रत्यक्षदर्शी की ज़ुबानी

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मुझे पक्का मालूम है कि मेरा घर नष्ट हो गया है. मैंने अपने पड़ोसियों से बात की है और उनका घर भी ख़त्म हो चुका है.
वे भी आग में फंस गए थे लेकिन किसी तरह निकलने में सफल हो गए. उनकी आवाज़ सुनकर बहुत राहत मिल रही है. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें मेरे जले हुए घर के कुछ अवशेष ही नज़र आ रहे थे.
यह घर मेरे पास पिछले 20 सालों से था लेकिन पिछले कुछ ही दिनों पहले मैं इसमें रहने वापस आई थी और इसके लिए मैंने इसे ठीक कराया था. मेरे पास जो भी कुछ था, सब नष्ट हो गया. ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाणपत्र, सब कुछ.
हमारा समुदाय बहुत घनिष्ठ था. मेरे परिचितों में से बहुत लोगों ने अपने माता-पिता और बच्चों को खो दिया है. सब कुछ जैसे एकदम ख़त्म हो गया है.
मैं बहुत निराश, स्तब्ध और डरी हुई हूँ.
भाग्यशाली
लेकिन फिर भी मुझे लग रहा है कि मैं कुछ भाग्यशाली लोगों में से हूँ. भाग्य से मेरे सभी परिजन और मैं आग लगने के वक़्त घर पर नहीं थे.
बहुत लोगों ने अपने माता-पिता और बच्चों को खो दिया है
मैं अपनी बहन के घर में थी और मेरे दोनों बेटे (चार और 21 वर्षीय) मेरे साथ ही थे.
जब मैं अपने किंगलेक स्थित घर जा रही थी तब पुलिस ने आग की वजह से रास्ता रोक दिया था.
उस वक़्त वहाँ ऐसा कुछ नहीं लग रहा था कि आग आसपास ही कहीं लगी है. तब वहाँ से सबसे पास लगी आग 80 किलोमीटर दूर पहाड़ों के पार थी लेकिन यह इतनी तेज़ी से फैल रही थी कि इतनी दूरी इसने 30 मिनटों में ही पूरी कर ली.
पुलिस ने सड़क तो बंद कर दी लेकिन हम जिस रास्ते से आए थे वहाँ भी नहीं जा सके क्योंकि पहाड़ों पर और घाटी में हवा बह रही थी और इसके साथ ही आग के लपटें फैल रही थीं. यही वजह थी कि मेरी बहन के घर का रास्ता भी आग के कारण बंद हो गया था.
राहत केंद्र
फिर हमें स्थानीय राहत केंद्र ले जाया गया. वहाँ पहले से ही हज़ारों लोग मौजूद थे. हालाँकि इस बारे में पहले से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी लेकिन राहत केंद्र चाय और सेंडविच के साथ पूरी तरह तैयार थे.
आग इतनी तेज़ी से फैल रही थी कि किसी को घर से निकलने तक का मौक़ा नहीं मिला. इसीलिए लोग सड़कों पर, अपनी कारों में और घरों के अंदर ही मारे गए
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मुझे वहाँ अपने बच्चों के साथ चार घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा. हमें पता था कि हमारे चारों ओर के पहाड़ों में आग लगी है.
जब हमने राहत केंद्र छोड़ा, हमारी सुरक्षा के लिए हमारे साथ पुलिस का एक आदमी था. जिस सड़क पर हम जा रहे थे उसके दोनों ओर की बाड़ में भी आग लगी हुई थी. हम अपने घर की कुशलता की प्रार्थना करते करते वापस आए.
आग इतनी तेज़ी से फैल रही थी कि किसी को घर से निकलने तक का मौक़ा नहीं मिला. इसीलिए लोग सड़कों पर, अपनी कारों में और घरों के अंदर ही मारे गए.
टीवी पर पूरे दिन एक दूसरे से बात करने और कुशलता पूछने के लिए लोग अपने नंबर देते रहे. इस हादसे से इतने लोग प्रभावित हुए हैं कि फ़ोन पर बात होनी लगभग असंभव ही थी इसीलिए मैं अपना नाम रजिस्टर कराने अपने क्षेत्र के राहत केंद्र तक गई और यह भी बताने कि मैं सुरक्षित हूँ. मुझे राहत के तौर पर एक हज़ार ऑस्ट्रेलिन डॉलर का चेक दिया गया.


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