'अफ़ग़ान लोगों का भरोसा डिगा'

अफ़ग़ान सरकार की अप्रूवल रेंटिंग( यानी कितने लोगों को उसमें भरोसा है) तो काफ़ी ज़्यादा है लेकिन ये धीरे-धीरे गिर रही है. लोगों ने हामिद करज़ई के काम को अच्छे से लेकर बहुत बेहतरीन कहा है.
लेकिन जो लोग अफ़ग़ान राष्ट्रपति के काम को ख़राब मानते हैं उनकी संख्या बढ़ी है.
विदेशी सैनिकों के लिए भी लोगों में समर्थन है लेकिन पिछले सर्वेक्षणों के मुकाबले ये गिर रहा है.
हालांकि आम लोग तालेबान के सख़्त ख़िलाफ़ हैं और वे इसे देश के लिए सबसे बड़े ख़तरे के रूप में देखते हैं. ज़्यादातर लोग नहीं चाहते कि चरमपंथी वापस लौटें.
सबसे बड़ा ख़तरा
कुछ अहम तथ्य 59 फ़ीसदी लोग मानते हैं कि सरकार बेहतर जीवन सुनिश्चित करने के दिशा में प्रगति कर रही है. 48 फ़ीसदी लोग मानते हैं कि अफ़गान सरकार अच्छा या बहुत अच्छा काम रही है. 63 फ़ीसदी लोग अमरीकी सेना की मौजूदगी के समर्थक
इस सर्वेक्षण में 1500 से ज़्यादा लोगों से सवाल पूछे गए और सभी 34 प्रांतों से नमूने लिए गए. महिलओं और पुरुषों दोनों से सवाल पूछे गए थे.
हेलमंद में हिंसा के कारण दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में नमूने ठीक से नहीं लिए जा सके और वहाँ लोगों की अलग-अलग राय थी.
आधारभूत ढाँचे को लेकर लोग असंतुष्ट थे और हेलमंद में तालेबान के बढ़ते प्रभाव को लेकर लोग चिंतित नज़र आए.
2005 के बाद से ये चौथा ऐसा सर्वेक्षण है और इसे संयुक्त रूप से बीबीसी, एबीसी न्यूज़ ऑफ़ अमेरीका और जर्मनी के एआरडी ने करवाया है.
सर्वेक्षण में कुछ सकारात्मक बातें निकल कर भी सामने आई हैं. कई लोग मानते हैं कि रोज़मर्रा के जीवन में सुधार हुआ है. 65 फ़ीसदी लोग मानते हैं कि साफ़ पानी उन्हें उपलब्ध है जबकि 2005 में 58 फ़ीसदी लोग ही ऐसा मानते थे.
कई लोगों का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए दी गई अरबों डॉलर की धनराशि का उन्हें सीधे तौर पर फ़ायदा नहीं हुआ है.
बीबीसी में राजनीतिक शोध मामलों के संपादक डेविड काउलिंग कहते हैं कि कई लोगों को अब चार साल पहले के मुताबिक कम उम्मीद है और उन्हें लगता है कि जिन बदलावों की उन्हें उम्मीद थी वो नहीं हुए.


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