वायुसेना के बूढ़े विमान भी भरेंगे उड़ान
आवाज से भी अधिक रफ्तार से उड़ान भरने वाले सुपरसोनिक विमानों की रोमांचकारी उड़ान का गवाह बनने वाले लोग भारत के इन धरोहर विमानों की अपेक्षाकृत मंद व मस्त उड़ान से प्रभावित हुए बगैर नहीं रहेंगे। ये विमान अपने अतीत की याद दिलाएंगे और इसका अहसास भी कराएंगे कि अभी भी उनके डैनों में जान है।
सेवा से बाहर हो चुके वायु सेना के दो विमानों डे हैवीलैंड डीएच 82 टाइगरमाथ और हार्वर्ड भी इस अंतर्राष्ट्रीय विमान प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। टाइगरमाथ दो सीटों वाला विमान है। द्वितीय विश्वयुद्घ के दौरान यह रॉयल एयर फोर्स का मूल प्रशिक्षक विमान हुआ करता था। 1940 में इसे भारतीय वायुसेना की सेवा में शामिल किया था। बाद में देसी तकनीकी से तैयार एचटी-2 विमान ने इसकी जगह ली।
दूसरी ओर हार्वर्ड विमान अपने जमाने में एकल इंजन वाला उन्नत विमान हुआ करता था जिसका इस्तेमाल पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता था।
इंडा-एशियन न्यूज सर्विस।


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