मप्र में कुपोषण मामले पर जन सुनवाई 10 फरवरी को
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के गठन के बाद यह पहला मौका है जब वह मध्य प्रदेश में जन सुनवाई करने जा रहा है। इस जन सुनवाई में आयोग की अध्यक्ष शांता सिन्हा, सदस्य दीपा दीक्षित, सलाहकार स्वाति नारायण व पोषण विशेषज्ञ डा.वंदना प्रसाद मौजूद रहेंगी। इस जन सुनवाई में मझगवां तहसील के आस पास के 20 गांव के कुपोषण प्रभावित परिवार सहित 500 प्रतिनिधियों को बुलाया गया है।
आदिवासी अधिकार मंच, भोजन का अधिकार अभियान और मध्य प्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच से मिली जानकारी के मुताबिक आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में न तो राष्ट्रीय रोजगार गारंटी के तहत मजदूरी का भुगतान हो रहा है, न ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली का तो आलम यह है कि गरीब परिवारों को 35 किलो प्रति माह अनाज की बजाए उन्हें 18 से 19 किलो अनाज मिल पा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार मझगवां तहसील में 15 सितंबर से 31 जनवरी के बीच 28 बच्चों की मौतें हुई हैं। इस तहसील में आने वाले गांव कुशयारा, चितहरा, देवलाहा, दुघवार, चौरेही, किरहाई पुखरी और गहिरा गढी घाट में अब भी बच्चे कुपोषण की चपेट में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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