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पुरातत्ववेताओं ने खोजा गुप्तकाल का स्तूप (लीड-1)

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नालंदा, 9 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार के नालंदा जिला के राजगीर की गिरीव्रज पहाड़ी पर पुरातत्ववेताओं ने एक विशाल स्तूप की खोज की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है। पुरातत्ववेता इसे गुप्तकाल का स्तूप होने की संभावना व्यक्त की है।

यह स्तूप लगभग 70 फुट लंबाई और 70 फुट चौड़ाई तथा 20 से 25 फुट उंचाई तक पत्थरों से काटकर बनाया गया है। इस स्तूप के उपर गुप्तकालीन कला की तरह अलंकृत ईंटों से स्तूप का निर्माण किया गया है। ईंट और पत्थरों से बने इस स्तूप के बीच 40 फुट लम्बा और 40 फुट चौड़ा पानी का टैंक भी बना हुआ है।

पुरातत्ववेता सुजीत नयन ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि यह संरचना आजातशत्रु द्वारा बनाये गये विश्व प्रसिद्घ साइक्लोपियन वाल के किनारे है। यह स्तूप पूर्वी चंपारण के बौद्ध केसरिया स्तूप के बाद सबसे बड़ा स्तूप है। उन्होंने बताया कि पंचाने नदी के किनारे ताम्रपाषाणकालीन घोड़ाकटोरा एवं गिरीव्रज पहाड़ी पर स्थित इस स्थल को विकसित किया जाए तो यह देश का सबसे बड़ा पर्यटक स्थल बन सकता है। हालांकि उन्होंने बताया कि स्तूप के चारों तरफ बने प्रदक्षिणा पथ रखरखाव के अभाव में बर्बाद होने के कगार पर है।

उनका मानना है कि इस स्तूप के समीप प्राप्त अवशेषों से पता चलता है कि यहां गुप्तकाल में भी नगरीय व्यवस्था रही होगी। हालांकि उन्होंने इस पर और अध्ययन की आवश्यकता बतायी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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