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चिंताजनक बनी हुई है वाजपेयी की स्थिति

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चिंताजनक बनी हुई है वाजपेयी की स्थिति

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्थिति चिंताजनक लेकिन स्थिर बनी हुई है. सोनिया गांधी और सोमनाथ चटर्जी ने एम्स जाकर उनका हालचाल पूछा.

उन्हें बुख़ार और सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद तीन फरवरी को नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था.

उनका इलाज कर रहे एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण के कारण उन्हें साँस लेने में परेशानी हो रही है और इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है.

एम्स के मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट डीके शर्मा ने बताया, "वाजपेयी जी की हालत चिंताजनक किंतु स्थिर बनी हुई है. उनकी श्वसन प्रणाली में संक्रमण है और इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है."

पूर्व प्रधानमंत्री का हालचाल पूछने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चैटर्जी शनिवार को एम्स पहुँचे. दोनों नेताओं ने डॉक्टरों और उनके परिवारजनों से बातचीत की.

 वाजपेयी जी की हालत चिंताजनक किंतु स्थिर बनी हुई है. उनकी श्वसन प्रणाली में संक्रमण है और इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है   डीके शर्मा, एम्स

 वाजपेयी जी की हालत चिंताजनक किंतु स्थिर बनी हुई है. उनकी श्वसन प्रणाली में संक्रमण है और इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है

बाद में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पत्रकारों को बताया, "मुझे पूरा भरोसा है कि वे जल्द ही अस्पताल से बाहर आ जाएँगे. मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ."

नागपुर में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में हिस्सा ले रहे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी एम्स फ़ोन करके अटल बिहारी वाजपेयी का हालचाल पूछा. उन्होंने भी उम्मीद जताई कि जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वस्थ हो जाएँगे.

'सक्रिय राजनीति से दूर'

84 वर्षीय अटल बिहारी वाजपेयी ख़राब स्वास्थ्य के कारण कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से अलग हैं. पिछली बार उन्हें कैमरे के सामने उस समय देखा गया, जब विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उनसे मिलने गए थे.

भारतीय जनता पार्टी के उदारवादी नेता माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1996 में भारत के प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन उस समय सिर्फ़ 13 दिन ही उनकी सरकार चली.

वाजपेयी को प्रखर वक्ता माना जाता है

एक बार फिर 1998 में उन्हें सरकार बनाने का मौक़ा मिला. लेकिन इस बार 13 महीने बाद फिर उनकी सरकार गिर गई. लेकिन इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता हासिल हुई.

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अक्तूबर 1999 में गठबंधन सरकार बनी. वाजपेयी सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया.

लेकिन वर्ष 2004 में हुए चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और फिर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी, जो अभी चल रही है.

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी जाना जाता रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वे ख़राब स्वास्थ्य के कारण सक्रिय राजनीति से अलग हैं.

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