अप्रैल से महंगी हो जाएगी शराब

शराब बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि इसे शराब बनाने में काम आने वाले शीरे की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से निपटने के लिए है उन्होंने कीमतें बढ़ाने की सोची है।
डिस्टिलरों का कहना है कि शीरे की कीमतों में जो बढ़ोतरी होगी, उसका असर भारत में बनने वाली विदेशी शराब (आईएमएफएल) पर भी नजर आएगा। इस सेगमेंट में फिलहाल 8 पीएम, बैगपाइपर ऑफिसर्स च्वाइस और ओल्ड मॉन्क जैसे ब्रांड का कब्जा है।
रबी सीजन में गन्ने की बुआई का इलाका कम हुआ है। ऐसे में अप्रैल से शुरू होने वाली तिमाही में शीरे की कीमत चढ़ने की संभावना जताई जा रही है। देश में शराब की कुल खपत में से 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी शीरा आधारित शराब की है।
देश की सबसे बड़ी डिस्टिलरी में से एक रेडिको खेतान लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर राज वजिराने ने कहा, 'गन्ने की बुआई का इलाका कम हुआ है। ऐसे में अप्रैल में शीरे की कीमत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हमें अप्रैल के बाद आईएमएफएल के अपने लो एंड ब्रांड के दामों में बढ़ोतरी करनी होगी ताकि कच्चे माल के बढ़ते दामों से निपटा जा सके।' शराब बनाने वाली कंपनियां कीमतों में इजाफे से निपटने के लिए प्रति केस कमीशन भी घटाने की तैयारी कर रही हैं।


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