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पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की हालत स्थिर

By Staff
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पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की हालत स्थिर

अटल बिहारी वाजपेयी तीन फरवरी से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती है. सीने में संक्रमण और बुख़ार की शिकायत के बाद उन्हें यहाँ भर्ती कराया गया था.

उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री को पूरी तरह ठीक होने में अभी कुछ समय लग सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में एम्स के डॉक्टर संपत कुमार ने कहा, "उनकी हालत स्थिर है. लेकिन अब भी उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है. लेकिन इलाज का असर हो रहा है."

उनकी हालत स्थिर है. लेकिन अब भी उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है. लेकिन इलाज का असर हो रहा है डॉक्टर संपत कुमार, एम्स

उनकी हालत स्थिर है. लेकिन अब भी उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है. लेकिन इलाज का असर हो रहा है

उन्होंने उन अफ़वाहों को ख़ारिज कर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री की स्थिति और बिगड़ी है. डॉक्टर संपत कुमार ने बताया कि अब उन्हें बुख़ार नहीं है. उनकी किडनी काम कर रही है, लीवर ठीक है जबकि रक्तचाप भी सामान्य है.

श्वसन प्रणाली में संक्रमण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उसका इलाज चल रहा है और दवाओं का असर एक-दो दिनों में दिखने लगेगा. हालाँकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पूरी तरह ठीक होने में कुछ समय लगेगा.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और लोकसभा अध्यक्ष सोमानाथ चटर्जी ने शनिवार को एम्स जाकर पूर्व प्रधानमंत्री का हालचाल पूछा था.

'सक्रिय राजनीति से दूर'

84 वर्षीय अटल बिहारी वाजपेयी ख़राब स्वास्थ्य के कारण कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से अलग हैं. पिछली बार उन्हें कैमरे के सामने उस समय देखा गया, जब विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उनसे मिलने गए थे.

भारतीय जनता पार्टी के उदारवादी नेता माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1996 में भारत के प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन उस समय सिर्फ़ 13 दिन ही उनकी सरकार चली.

वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे

एक बार फिर 1998 में उन्हें सरकार बनाने का मौक़ा मिला. लेकिन इस बार 13 महीने बाद फिर उनकी सरकार गिर गई. लेकिन इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता हासिल हुई.

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अक्तूबर 1999 में गठबंधन सरकार बनी. वाजपेयी सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया.

लेकिन वर्ष 2004 में हुए चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और फिर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी, जो अभी चल रही है.

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी जाना जाता रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वे ख़राब स्वास्थ्य के कारण सक्रिय राजनीति से अलग हैं.

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