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रीढ़, कमर और कंधों के व्यायाम के लिए...

By Staff
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रीढ़, कमर और कंधों के व्यायाम के लिए...

सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें. फिर घुटनों के बल खड़े हो जाएँ. दोनों घुटनों और पैरों में थोड़ा अंतर रखें. साँस भरते हुए दोनों बाजुओं को कंधे की सीध में 180 डिग्री पर लाएँ.

अब साँस छोड़ते हुए दाएँ हाथ से दाएँ पैर की एड़ी पकड़े और बाएँ हाथ को कंधों के सामने लेकर आएँ. बाज़ू सीधा रखें. बाएँ हथेली की ओर देखें और साँस रोककर रखें. साँस रोकने में असुविधा हो तो सामान्य तरीके से साँस लें.

ज़्यादा पीछे नहीं झुकें. कमर को आगे की ओर धकेलें. इस अवस्था में दस सेकेंड रुकें. कमर के निचले भाग में खिंचाव महसूस करें. अब पहले जैसी अवस्था में वापस आएँ. यानी साँस भरते हुए बाज़ुओं को कंधे की सीध में लाएँ.

इसी तरह बाएँ हाथ से बाएँ पैर की एड़ी पकड़ें और अर्ध उष्ट्रासन का दोबारा अभ्यास करें. घुटनों या कमर में दर्द हो तो इसका अभ्यास नहीं करें.

लाभ

अर्ध उष्ट्रासन के अभ्यास से पेट के सभी अंगों और ख़ासतौर पर आँतों में खिंचाव आता है, जिससे कब्ज़ दूर होती है.

इससे रीढ़ के हर जोड़ में खिंचाव आता है और लचक बढ़ती है. जिनके कंधे झुके हुए हैं, छाती धंसी हुई और पीठ उभरी हुई है, उनके लिए अर्ध उष्ट्रासन विशेष रूप से लाभदायक है.

मंडूक आसन

पाचन तंत्र के लिए यह बेहद उपयोगी है

सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें. दोनों हाथों की मुट्ठी बनाएँ. अँगुलियों को बाहर और अँगूठा अंदर की ओर रखें.

दोनों मुट्ठियों को आपस में इस तरह से मिलाएँ कि चारों अँगुलियाँ आपस में मिली रहें. अँगूठे के मूल को नाभि से सटाकर रखें.

अब रीढ़ को सीधा करें. छाती ताने और कंधों को खींचकर रखें. गहरी साँस भरें और साँस छोड़ते हुए कमर से आगे झुकते जाएँ. सामने की ओर देखें और नाभि पर मुट्ठी का दबाव महसूस करें.

जब आप आगे की ओर झुकें, तब इस बात का ध्यान रखें कि नितंब का स्पर्श एड़ी से बना रहे. आगे की ओर झुकते हुए नितंब ऊपर नहीं उठाएँ. इस अवस्था में दस सेकेंड रूकें. साँस भी रोककर रखें.

इसके बाद साँस भरते हुए शरीर को सीधा करें और दोबारा वज्रासन में बैठ जाएँ. पाँच बार इस प्रक्रिया को दोहराएँ.

लाभ

मंडूक आसन के नियमित अभ्यास से पेट के सभी अंगों और ख़ासतौर पर अग्नाशय की कार्यक्षमता बढती है. पाचन तंत्र के लिए यह बेहद उपयोगी है.

कमर दर्द या अल्सर की शिकायत होने पर मंडूक आसन नहीं करें. मधुमेह के रोगी भी नियमित रूप से इसका अभ्यास कर सकते हैं. आसन करते समय नाभिकेंद्र पर अपना ध्यान लगाएँ.

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