क़दीर ख़ान की नज़रबंदी हटी

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की नज़रबंदी हटाने के आदेश दिए हैं. उनपर परमाणु तकनीकों और उपकरणों की तस्करी के आरोप लगे थे.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए गए फ़ैसले में कहा है कि क़दीर ख़ान अब अपने घर से निकल सकते हैं और मेहमानों से मिल सकते हैं.हालाँकि कहीं आने-जाने से पहले उन्हें सरकारी अधिकारियों को सूचित करना होगा.
ज़रदारी भी आठ साल जेल में रहे और नवाज़ शरीफ़ को भी देश निकाला दिया गया लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई मामला साबित नहीं हुआ. ये होता रहता है क़दीर ख़ान
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सरकार का कहना है कि ऐसी व्यवस्था क़दीर ख़ान की सुरक्षा को देखते हुए की गई है.
क़दीर ख़ान के पक्ष में फ़ैसला आते ही पत्रकारों को उनसे मिलने की अनुमति मिली. उनका कहना था, "मैं आज़ाद हूँ. पहले पत्रकार मुझसे इस तरह नहीं मिल सकते थे."
उन्होंने स्पष्ट किया कि देश छोड़ कर जाने का उनका कोई इरादा नहीं है. क़दीर ख़ान का कहना था, "मैं अपने देश में ही रहूँगा. अगर सरकार मुझसे किसी मामले पर सलाह लेना चाहती है तो मैं तैयार हूँ."
परमाणु तस्करी में संलिप्त रहने के कुछ देशों के आरोपों के बारे में क़दीर ख़ान ने कहा, "मैं उनके प्रति जवाबदेह नहीं हूँ. मैं सिर्फ़ अपनी सरकार के प्रति जवाबदेह हूँ."
ये पूछे जाने पर कि क्या सरकार से उनकी कोई शिकायत है, तो उनका कहना था, "नहीं, कोई नहीं. ज़रदारी भी आठ साल जेल में रहे और नवाज़ शरीफ़ को भी देश निकाला दिया गया लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई मामला साबित नहीं हुआ. ये होता रहता है."


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