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लुटेरों ने हथियारों से लदा जहाज़ छोड़ा

By Staff
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लुटेरों ने हथियारों से लदा जहाज़ छोड़ा

एमवी फ़ैना हथियारों की खेप लेकर यूक्रेन से चला था, लुटेरों ने इसे पिछले साल सितंबर में अगवा कर लिया था.

लुटेरों ने पहले फिरौती के तौर पर दो करोड़ डॉलर की माँग की थी लेकिन अब बताया जा रहा है कि काफ़ी मोलभाव के बाद जहाज़ को 22 लाख डॉलर की रकम लेकर छोड़ा गया है.

इस जहाज़ पर लदे माल को लेकर भी विवाद है, कीनिया का कहना है कि जहाज़ पर लदे 33 टी-72 टैंक, रॉकेट लॉन्चर और अन्य हथियार उसके हैं जबकि जहाज़ पर मौजूद काग़ज़ात से पता चलता है कि हथियार दक्षिणी सूडान जा रहे थे.

सोमालिया तट को पार करके जब यह जहाज़ कीनिया के मोम्बासा तट की ओर बढ़ रहा था तब लुटेरों ने 25 सितंबर को इस पर कब्ज़ा कर लिया, जहाज़ पर 20 चालक दल के बीस लोग सवार थे.

इस जहाज़ को अन्य अपहृत जहाज़ों के साथ हाराधीरे तट पर खड़ा रखा गया था.

अमरीकी नौसेना का कहना है कि बुधवार को लुटेरों को फिरौती की रकम दी गई जिसके बाद जहाज़ को मुक्त किया गया.

समुद्री लुटेरों ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को फ़ोन करके बताया कि "हमने एमवी फ़ैना को छोड़ दिया है, अब जहाज़ पूरी तरह मुक्त हो गया है."

लुटेरों के एक सरगना सुगल अली ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि "कोई बड़ी फिरौती नहीं मिली है, कुछ रक़म मिली है जिससे हमारा ख़र्च निकल आएगा."

कोई बड़ी फिरौती नहीं मिली है, कुछ रक़म मिली है जिससे हमारा ख़र्च निकल आएगा सुगल अली, लुटेरों के प्रवक्ता

कोई बड़ी फिरौती नहीं मिली है, कुछ रक़म मिली है जिससे हमारा ख़र्च निकल आएगा

जहाज़ के चालक दल में 17 यूक्रेनी, दो रूसी और एक लातवियाई नागरिक था, यूक्रेनी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सभी अपहृत लोग स्वस्थ और सुरक्षित हैं.

अब यह यूक्रेनी जहाज़ कीनिया के समुद्र तट मोम्बासा के लिए अमरीकी नौसेना की निगरानी में रवाना हो रहा है.

भारतीय नौसेना सहित दुनिया के कई देशों के नौसैनिक सोमालिया के समुद्री तट के आसपास गश्त लगा रहे हैं ताकि समुद्री लुटेरों के आतंक को समाप्त किया जा सके लेकिन जहाज़ों के अपहरण का दौर समाप्त नहीं हुआ है.

कीनिया से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब लोगों का सारा ध्यान इस बात पर होगा कि ये हथियार किसके लिए हैं, अगर ऐसी बात सामने आती है कि कीनिया दक्षिणी सूडान में इस्तेमाल किए जाने के लिए हथियार उपलब्ध करा रहा है तो यह कूटनीतिक विवाद बन जाएगा.

कीनिया की सरकार ने मध्यस्थता करके दक्षिणी सूडान के विद्रोहियों और सूडान सरकार के बीच तीन वर्ष पहले शांति समझौता कराया था.

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