अस्पताल पर बम हमला, 52 की मौत

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार श्रीलंका के एक अस्पताल पर हुए बम हमले में 52 नागरिकों की मौत हुई है. इतनी बड़ी संख्या में लोग पहली बार मारे गए हैं.श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार आम नागरिक मारे गए हैं.
सेना ने कहा है कि दोनों अस्पतालों में बम गिराने में उसका कोई हाथ नहीं है. तमिल विद्रोहियों की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है.
इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने देश छोड़कर गए लोगों से वापस लौटने की अपील करते हुए कहा है कि 'तमिल विद्रोही कुछ ही दिनों में पूरी तरह परास्त' हो जाएँगे. श्रीलंका बुधवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इस आयोजन में भाषण करते हुए राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की है.
निशाने पर अस्पताल
जिन दो अस्पतालों पर क्लस्टर बम डाल गए हैं उनमें से एक तो वह है जिसे पिछले पिछले कुछ दिनों में पाँच बार निशाना बनाया गया है और बम हमले किए गए हैं. स्वतंत्रता दिवस पर युद्ध का साया दिखाई पड़ रहा है
मलाइतिवु ज़िले के पुतुकुदीयिरुप्पु में स्थित इस अस्पताल पर जब क्लस्टर बम गिराए गए तो अस्पताल खाली पड़ा था. लेकिन इस अस्पताल से कोई 20 किलोमीटर दूर स्थित सुधांतिपुरम के एक अस्थाई अस्पताल में पर हुए गोलाबारी में कम से कम 52 नागरिकों की मौत हुई है.
समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि यह अस्पताल जिस इलाक़े में स्थित है वहाँ तमिल विद्रोहियों के अलावा ढाई लाख आम नागरिक फँसे हुए हैं.
समाचार एजेंसियों का कहना है कि वर्ष 2006 में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांतिवार्ता टूटन के बाद से जो संघर्ष शुरु हुआ है उसमें पहली बार क्लस्टर बमों का उपयोग किया गया है.
जीत का दावा
उधर स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाषण देते हुए राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने कहा है कि सरकार 'आतंक को ख़त्म करने के क़रीब' पहुँच गई है. राजपक्षे तमिल विद्रोहियों पर जल्दी ही पूरी जीत का दावा कर रहे हैं
उन्होंने कहा, "मैं देश छोड़कर चले गए श्रीलंका के सभी समुदायों से अपील करता हूँ कि वे वापस लौट आएँ." इस बीच सरकार और तमिल विद्रोहियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव बना हुआ है कि वे संघर्ष विराम करें.
श्रीलंका को आर्थिक मदद देने वाले अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने तमिल विद्रोहियों से अनुरोध किया है कि वे हथियार डाल दें और संघर्ष समाप्त कर दें ताकि आम नागरिकों को निशाना बनने से बचाया जा सके.
अमरीका, यूरोपीय संघ और नोर्वे ने कहा कि इसमें अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा जब विद्रोही सभी इलाक़ों पर अपना नियंत्रण खो देंगे. उनका कहना है कि दोनों पक्षों को ये महसूस करना चाहिए कि लोगों की मौत से कुछ हासिल नहीं होने वाला है.


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