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अधिकतर तेल 'ट्रांस फ़ैट' युक्त हैं: अध्ययन

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अधिकतर तेल 'ट्रांस फ़ैट' युक्त हैं: अध्ययन

एक अध्ययन के अनुसार भारत में अधिकतर खाद्य तेल ऐसे हैं जिनमें ट्रांस फ़ैट की मात्रा बहुत अधिक है. ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है.ट्रांस फ़ैट दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा घटा देता है.

ये अध्ययन एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने किया है. सीएसई ने बाज़ार में उपलब्ध तेल, वनस्पति घी, मक्खन और घी बनाने वाली तीस कंपनियों के उत्पादों की जाँच के बाद पाया कि इन सभी उत्पादों में ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़रूरत से कई गुना अधिक है.

ट्रांस फ़ैट एक असंतृप्त वसा है जो खाद्य तेल की जीवन अवधि बढ़ाने में सहायक होता है. सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण का कहना है, "ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है. इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है."

बीमारी

सुनीता का कहना है कि ट्रांस फ़ैट महिलाओं में बांझपन का ख़तरा बढ़ा देता है.  ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है. इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है   सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण

 ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है. इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है

सीएसई की जाँच में सभी ब्रांड के वनस्पति घी में ट्रांस फ़ैट की मात्रा डेनमार्क में स्थापित मानक के मुकाबले में पाँच से 12 गुना अधिक पाई गई.

सुनीता का कहना है, "अध्ययन के अनुसार अगर डेनमार्क के मानक से तुलना की जाए तो भारत में किसी भी खाद्य तेल के स्वास्थ्य के लिए सही होने के बारे दावा नहीं किया जा सकता है."

उनका कहना है कि दुनिया के कई देश खाद्य तेल में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं और भारत में भी खाद्य पदार्थों की निगरानी करने वाली संस्था ने ट्रांस फ़ैट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है.

सुनीता के अनुसार वर्ष 2004 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ट्रांस फ़ैट के मानक को तय करने पर विचार करना शुरु किया और वर्ष 2008 में सेंटर कमेटी फ़ॉर फूड को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भी भेजा था लेकिन इस पर फ़ैसला लिया जाना अभी भी बाक़ी है.

अध्ययन के अनुसार ट्रांस फ़ैट की मात्रा सबसे अधिक वनस्पति घी और फिर वनस्पति तेल में है जबकि इसकी सबसे कम मात्रा घी और मक्खन में पाई जाती है.

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