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इंसुलिन से अल्ज़ाइमर्स का इलाज

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hands getty

अमरीका के वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुमेह में दिये जाने वाला हॉर्मोन इंसुलिन अल्ज़ाइमर्स रोग का नया संभावित इलाज साबित हो सकता है.अमरीका में हुए परीक्षणों में शोधार्थियों ने पाया कि इंसुलिन याददाश्त खोने से मस्तिष्क का बचाव करता है.

शोधार्थियों की टीम ने कहा कि अल्ज़ाइमर्स दरअसल मस्तिष्क के मधुमेह का ही एक रूप हो सकता है.किसी भी व्यक्ति को तब मधुमेह होता है जब उसका शरीर इंसुलिन हॉर्मोन को बनाने में असमर्थ हो जाता है.

लेकिन पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने पाया कि इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी मस्तिष्क से याददाश्त मिटाने वाले अल्ज़ाइमर्स रोग को बढ़ाने में सहायक एक कारक हो सकता है.

संवेदनशीलता

अमरीका में नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय और ब्राज़ील में रियो डी जनेरो के फ़ेडरल विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने पाया कि इंसुलिन ने मस्तिष्क के याददाश्त केंद्र से ली गई कोशिकाओं का उन ज़हरीली प्रोटीनों से बचाव किया जो अल्ज़ाइमर्स में उन पर हमला करती हैं.

इस परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा कि इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता उम्र के साथ कम होती जाती है.

उनके विचार से अल्ज़ाइमर्स मस्तिष्क के मधुमेह का ऐसा रूप है जहाँ ख़तरनाक प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं को इंसुलिन की सुरक्षा की कमी होने की वजह से ख़ासा नुकसान पहुँचा सकती हैं.

अब शोधार्थियों को उम्मीद है कि अल्ज़ाइमर्स के इलाज का यह नया तरीक़ा मधुमेह की मौजूदा दवाओं के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं का बचाव याददाश्त समाप्त होने से कर सकता है.

शोधार्थियों ने चेतावनी दी है कि वे अपने इस शोध की शुरूआती अवस्था में हैं और मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स और इंसुलिन के संबंध के बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाक़ी है. इसकी रिपोर्ट नेशनल अकादमी ऑफ़ साइंसेज़ के प्रकाशन 'यूएस जर्नल" में प्रकाशित हुई है.

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