वकीलों की हड़ताल से अदालती कामकाज ठप

वकीलों ने एकजुट होकर सीआरपीसी के संशोधन को वापस लिये जाने की मांग की है। वकीलों की एसोसिएशंस ने राष्ट्रपति और गृहमंत्री को इस संबंध में एक ज्ञापन भी भेजा है। इस संशोधन के तहत सात साल की सजा के प्रावधान वाले किसी भी मामले में पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करना अनिवार्य नहीं होगा।
हड़ताली वकीलों की समन्वय समिति के प्रवक्ता राजीव खोसला के मुताबिक सीआरपीसी में संशोधनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल अभी तक सफल रही है। हड़ताल में 18 जिला अदालतों की बार एसोसिएशंस और विभिन्न उच्च न्यायालयों की 14 बार एसोसिएशन शामिल हैं।
सीआरपीसी में संशोधन का विरोध करते हुए खोसला ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन अपराधियों के जहन से डर मिटा देगा और वे निजी लाभ के लिए इसके प्रावधानों का दुरुपयोग करेंगे।
उन्होंने बताया कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वकील 18 फरवरी को फिर से देशव्यापी हड़ताल करेंगे। यही नहीं 18 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल के दौरान विरोध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया जाएगा।


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