'मुसलमानों को विकास का लाभ दिए जाने की जरूरत'
न्यायमूर्ति अहमदी, रविवार को यहां मुस्लिम संगठनों की संयुक्त समिति की ओर से मुस्लिम आरक्षण पर आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।
अहमदी ने कहा, "आजादी के बाद देश में मुसलमान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उपेक्षा के शिकार हुए हैं। मुसलमान अपने आप को अलग-थलग व हताशा की स्थिति में पा रहे हैं।"
इस सम्मेलन में कई मुस्लिम संगठनों व विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर अहमदी ने कहा, "मुसलमानों को मुख्य धारा में लाए जाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की जरूरत है।"
सम्मेलन में मुसलमानों के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की नौकरियों तथा उच्च व पेशेवर संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की गई।
सम्मेलन की ओर से यह भी कहा गया कि मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण के लिए बैंक ऋण तथा विकास व कल्याण के विशेष लाभ दिए जाने चाहिए।
सम्मेलन के संयोजक, पूर्व सांसद सैयद शहाबुद्दीन ने अपने प्रस्तावना भाषण में कहा कि न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा आयोग ने मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी जाति के रूप में पहचान की थी।
उन्होंने सरकार से इन दोनों सिफारिशों को स्वीकारने की अपील की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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