'युद्धक्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित'

संयुक्त राष्ट्र बालकोष यानी यूनिसेफ़ का कहना है कि श्रीलंका में बीते दस दिनों में लड़ाई के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे मारे गए हैं या फिर जख़्मी हुए हैं.
यूनिसेफ़ ने सरकार और तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई से बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए कहा है.
उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने शुक्रवार को श्रीलंका की सरकार और तमिल विद्रोहियों से युद्धक्षेत्र में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकलने के लिए रास्ता देने की अपील की थी.
महासचिव ने तमिल विद्रोहियों से ख़ासतौर पर नागरिकों को युद्धक्षेत्र से निकलने के लिए रास्ता देने का आह्वान किया है ताकि वह सरकार नियंत्रित इलाकों समेत वहाँ जा सकें, जहाँ वह सुरक्षित महसूस करते हैं संयुक्त राष्ट्र महासचिव
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने श्रीलंका की सरकार से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वान्नी और अन्य इलाकों से आ रहे नागरिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवहार किया जाए.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रेस ऑफ़िस ने एक बयान में कहा, "महासचिव ने तमिल विद्रोहियों से ख़ासतौर पर नागरिकों को युद्धक्षेत्र से निकलने के लिए रास्ता देने का आह्वान किया है ताकि वह सरकार नियंत्रित इलाकों समेत वहाँ जा सकें, जहाँ वह सुरक्षित महसूस करते हैं."
बच्चों पर ख़तरा
एक अनुमान के मुताबिक श्रीलंका के उत्तरी युद्धक्षेत्र में लगभग सवा लाख नागरिक फंसे हुए हैं.
हमारे पास स्पष्ट सबूत हैं कि गोलीबारी के बीच बच्चे फंस रहे हैं. बच्चे घायल हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं. डेनियल टूल, यूनिसेफ़ के निदेशक
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यूनिसेफ़ के दक्षिण एशिया के निदेशक डेनियल टूल ने कहा, "हमारे पास स्पष्ट सबूत हैं कि गोलीबारी में बच्चे फंस रहे हैं. बच्चे घायल हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं. यह बेहद ज़रूरी है कि सुरक्षित इलाकों, स्कूलों और चिकित्सा केंद्रों को बचाया जाए और हर हाल में उन्हें शांति क्षेत्र माना जाए."
उन्होंने ये भी कहा कि बच्चे उस संघर्ष का शिकार बन रहे हैं जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने हज़ारों फँसे हुए बच्चों की हालत के बारे में गंभीर चिंता भी जताई.


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