लोग हमारे संरक्षण में रहना चाहते हैं: लिट्टे

लोग हमारे संरक्षण में रहना चाहते हैं- एलटीटीई

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि संघर्ष वाले इलाक़ों में फँसे आम लोग उन्हीं के संरक्षण में रहना चाहते हैं. कई गुट वहाँ संघर्ष विराम की माँग कर रहे हैं.

इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने विद्रोहियों से अपील की थी कि वे आम लोगों को उस इलाक़े से जाने दें. मगर साथ ही सरकार ने संघर्ष विराम से इनकार किया है.

विद्रोहियों के राजनीतिक मामलों के प्रमुख बी नदेसन ने कहा कि लोग 'उनके हत्यारों' के हाथों में नहीं जाना चाहते. इस बीच स्वास्थ्य अधिकारियों और मानवाधिकारों से जुड़े समूहों ने सैकड़ों आम लोगों के मारे जाने की आशंका व्यक्त की है.

'अधिकारों का हनन'

राष्ट्रपति राजपक्षे का कहना है कि वह आम लोगों को सुरक्षित निकलने का अवसर मुहैया करा रहे हैं.

ये एक लगातार बिगड़ती मानवीय त्रासदी है. लड़ाई वाले इलाक़ों में फँसे लोगों की स्थिति को लेकर हम काफ़ी चिंतित हैं लुई मिचल, यूरोपीय संघ मानवाधिकार आयुक्त

ये एक लगातार बिगड़ती मानवीय त्रासदी है. लड़ाई वाले इलाक़ों में फँसे लोगों की स्थिति को लेकर हम काफ़ी चिंतित हैं

कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस के मुताबिक़ नदेसन ने उन्हें बताया है कि आम लोगों को सुरक्षित जाने देने के राजपक्षे के प्रस्ताव के बाद से भी 28 लोगों की मौत हो चुकी है.

हताहतों की संख्या की पुष्टि किसी स्वतंत्र स्रोत से नहीं हो पा रही है. इससे पहले राष्ट्रपति राजपक्षे कह चुके हैं कि तमिल विद्रोही प्रभावित क्षेत्रों से आम लोगों को बाहर जाने नहीं दे रहे हैं.

नदेसन ने आम लोगों को जाने से रोकने के आरोप से इनकार किया है. उन्होंने ये भी बताया कि विद्रोहियों के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण के साथ उनका संपर्क हर रोज़ होता है और वो अब भी पूरे जोश में हैं.

संघर्ष विराम

उधर यूरोपीय संघ ने संघर्ष तुरंत समाप्त करने की माँग की है. संघर्ष की वजह से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. यूरोपीय संघ के मानवीय राहत मामलों के आयुक्त लुई मिचल ने कहा, "ये एक लगातार बिगड़ती मानवीय त्रासदी है. लड़ाई वाले इलाक़ों में फँसे लोगों की स्थिति को लेकर हम काफ़ी चिंतित हैं."

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने भी तुरंत संघर्ष विराम की माँग की है. मगर श्रीलंका सरकार ने किसी सुलह की संभावना से फिर इनकार किया है.

मानवाधिकार मामलों के श्रीलंकाई मंत्री महिंदा समरसिंघे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम अपना सैनिक अभियान जारी रखेंगे और साथ ही अब तक क़ब्ज़े में रहे इलाक़ों को स्वतंत्र कराते रहेंगे."

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की आयुक्त नवी पिल्लै ने भी संघर्ष वाले इलाक़ों में फँसे आम लोगों की स्थिति को लेकर काफ़ी चिंता व्यक्त की है.

सेना का दावा

श्रीलंका सेना का कहना है कि विद्रोहियों को खदेड़ने का काम अंतिम चरण में है. सेना ने पिछले कुछ हफ़्तों में किलिनोच्ची और मुल्लइतिवू शहरों के साथ ही रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण एलिफ़ैंट दर्रे पर भी नियंत्रण कर लिया है.

हमारे संवाददाताओं के मुताबिक़ सैनिक कमांडर अगले कुछ दिनों में संघर्ष समाप्त हो जाने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं.

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