मुख्य चुनाव आयुक्त की अनुशंसा पर सरकार करेगी विचार : कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आईएएनएस को बताया, "राष्ट्रपति कार्यालय ने सीईसी से पत्र प्राप्त होने की पुष्टि की है। सरकार ने मामले को अपने अधिकार में ले लिया है और वह यह तय करेगी कि इस मामले के साथ कैसे निपटा जाए।"
तिवारी ने शनिवार को प्रकाशित उस खबर के बारे में न तो कोई विस्तृत जानकारी दी और न उस पर अपनी टिप्पणी ही की, जिसमें गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सुझाव दिया था कि पक्षपाती होने के कारण नवीन चावला को पदमुक्त कर दिया जाए।
इस मामले पर गोपालस्वामी ने बात करने से इंकार कर दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सरकार को एक विशेषाधिकार युक्त दस्तावेज भेजा गया है।
उन्होंने कहा, "मैं इतना ही कह सकता हूं कि इस बारे में ज्यादा कुछ बात नहीं करूंगा।"
जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने राष्ट्रपति को दस्तावेज कब भेजा तो उन्होंने कहा, "जब राष्ट्रपति ने दस्तावेज प्राप्त किया।"
राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त का पत्र पिछले हफ्ते प्राप्त हुआ था।
चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजेश मल्होत्रा ने आईएएनएस को बताया कि वह यात्रा पर हैं, लिहाजा इस मुद्दे पर वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस कदम को लेकर कानूनी हल्कों में दो तरह की राय सामने आई है।
संविधान विशेषज्ञ के.के.वेणुगोपाल का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को किसी अन्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है।
जाने-माने कानून विशेषज्ञ फली नरीमन ने भी गोपालस्वामी के कदम को उचित नहीं ठहराया है।
हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का विचार इससे अलग है। उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त होने के नाते यह उनका नैतिक व कानूनी कत्र्तव्य बनता है कि वह चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता व ईमानदारी बनाए रखें।"
धवन कहते हैं, "यदि वह किसी चुनाव आयुक्त को पक्षपाती पाते हैं तो राष्ट्रपति से उसे हटाने की अनुशंसा करने के लिए वह पूरी तरह अधिकृत हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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