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स्वात के बच्चों का बिखरता सपना

By Staff
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स्वात के बच्चों का बिखरता सपना

पिछले पौने दो साल में स्वात इलाक़े में 200 से अधिक स्कूलों पर हमले हुए हैं. पाकिस्तानी सरकार के आंकड़ों के अनुसार सेना और चरमपंथियों के बीच हो रही लड़ाई में स्वात घाटी में 1200 नागरिकों और 189 फ़ौजियो ने अपनी जान गँवाई है.

चरमपंथियों का स्वात घाटी के अहम शहर मिंगोरा के आसपास के इलाक़ो पर पर ख़ासा प्रभाव है. गुरुवार को पाकिस्तानी सरकार ने दावा किया कि मिंगोरा सहित आसपास के इलाक़ो पर सुरक्षा बलों का पूरा कंट्रोल है और बाक़ी बचे चरमपंथियों को खदेड़ दिया जाएगा.

लेकिन स्वात घाटी में बड़ा सवाल यह है कि क्या सुरक्षाबल चरमपंथियों के हमलों से स्कूलों की सुरक्षा कर पाएँगे?

लड़कियों पर पाबंदी

चरमपंथियों ने एक सप्ताह पहले स्कूलों में लड़कियों के पढ़ने पर पाबंदी की घोषणा की थी.

शेर अफ़ज़ल ख़ान के अनुसार लगभग 60 हज़ार छात्र-छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है

ऐसी स्थिति में जो माता-पिता स्वात को छोड़कर दूसरी जगह जाने में सक्षम हैं वो निश्चित तौर पर स्वात छोड़कर दूसरी जगह जाना चाहेंगे.

लेकिन जिन लोगों को इलाक़े में रहना पड़ेगा उनके पास कोई आसान जवाब नहीं है.

इलाक़े में आम लोग सुरक्षाकर्मियों की क्षमता पर शक करते हैं कि वो तालेबान लड़ाकों को नियंत्रित करने कामयाब हो सकेंगे.

एक निवासी जो ज्यादातर लोगों की तरह अपना नाम नहीं बताना चाहते, कहते हैं, " तालेबान तो हर जगह है, जबकि सेना सिर्फ़ बैरिकेड में हैं."

स्कूल निशाने पर

पिछले 20 महीनों में 187 स्कूलों पर हमले किए गए हैं जिन में 121 स्कूल लड़कियों के थे शेर अफ़ज़ल ख़ान

पिछले 20 महीनों में 187 स्कूलों पर हमले किए गए हैं जिन में 121 स्कूल लड़कियों के थे

सेना उन स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है जहाँ तालेबान संभावित हमले कर सकते हैं.

लेकिन माता-पिता को डर है कि जिन स्कूलों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे वो स्कूल चरमपंथी हमलों के अधिक निशाने पर होंगे.

स्वात में पिछले दो वर्षों से तालेबान और सेना के बीच लड़ाई चल रही है. तालेबान अपनी तरह का इस्लाम लागू करना चाहते हैं जबकि सरकार उन्हें कुचलने के लिए हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर रखा है.

लेकिन चरमपंथियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला करके उन्हें बचाव की मुद्रा में आने पर मजबूर कर दिया है. तालेबान ने सेना के शिविरों और चेकपोस्टों पर कई हमले किए हैं.

लोगों का ख़्याल है कि तालेबान स्कूलों पर इसलिए हमला कर रहे हैं ताकि वो इन स्कूलों को मदरसों में बदल सकें.

लड़ाई का मोर्चा

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी शेर अफ़ज़ल ख़ान का कहना है, "पिछले 20 महीनों में 187 स्कूलों पर हमले किए गए हैं जिनमें 121 स्कूल लड़कियों के थे."

तीन महीने पहले तालेबान ने छात्रों को स्त्री रोग वार्ड या प्रसव कक्ष में व्यवहारिक क्लास में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी है मेडिकल कॉलेज के एक प्रध्यापक

तीन महीने पहले तालेबान ने छात्रों को स्त्री रोग वार्ड या प्रसव कक्ष में व्यवहारिक क्लास में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी है

इसके अलावा 86 स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही है क्योंकि इनमें तालेबान या सेना के शिविर हैं या ये स्कूल लड़ाई का मोर्चा हैं जहाँ डर की वजह से शिक्षक और छात्र नहीं जाते.

खा़न का कहना है, "लगभग 60 हज़ार छात्र-छात्रओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है और उच्च शिक्षा के केंद्र भी इससे अछूते नहीं हैं."

मिंगोरा के स्वात मिडिकल कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर का कहना है, "तीन महीने पहले तालेबान ने छात्रों को स्त्री रोग वार्ड या प्रसव कक्ष में व्यावहारिक क्लास में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी है."

इसके बाद तालेबान ने मेडिकल कॉलेज में अपने प्रतिनिधियों को भेजना शुरू कर दिया है ताकि इस बात की निगरानी की जा सके कि अस्पताल उनकी पांबदी को तोड़ तो नहीं रहे हैं.

उनका कहना है," हमें स्त्री रोग के क्लास को मरदान (दूसरे ज़िले) में करवा रहे हैं, अब यह प्रस्ताव है कि कॉलेज को ही मरदान में ले जाया जाए."

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