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नागरिकों को सुरक्षित निकलने दे 'एलटीटीई

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pranab, mahindra

श्रीलंका सरकार ने एलटीटीई से आग्रह किया है कि नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने दिया जाए. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसका स्वागत किया है.श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई से आग्रह किया है कि युद्ध या हिंसा प्रभावित क्षेत्र से आम लोगों को बाहर निकलने की मोहलत दी जाए.

इसके लिए एलटीटीई के सामने प्रस्ताव रखा गया है कि 48 घंटे के लिए आम लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकलने के लिए रास्ता दिया जाए ताकि उनकी सुरक्षा और बचाव को तय किया जा सके.

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में गुरुवार रात श्रीलंका सरकार की इस कोशिश की प्रशंसा की गई है.ग़ौरतलब है कि भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी श्रीलंका से कह चुके हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि युद्ध के दौरान आम लोगों को नुकसान न हो.

उन्होंने श्रीलंका सरकार से लोगों को सुरक्षित बाहर निकलवाने की व्यवस्था करने की अपील की थी. इसके कुछ समय बाद ही श्रीलंका के राष्ट्रपति ने अपने आग्रह में एलटीटीई से आम लोगों को निकलने के लिए 48 घंटे की मोहलत देने की बात कही है.

संघर्ष जारी

कुछ मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि सेना और एलीटीई के बीच संघर्ष में पिछले कुछ दिनों के दौरान सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और लाखों अन्य संघर्ष वाले इलाक़े में फँसे हुए हैं.हज़ारों लोग अभी भी उन इलाकों मं फंसे हैं जहाँ संघर्ष चल रहा है

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने हाल में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से कोलंबो में मुलाकात कर सरकार से आश्वासन माँगा था कि जो आम नागरिक इस संघर्ष के कारण उस क्षेत्र में फँस गए हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. श्रीलंका ने भारत को ऐसा आश्वासन भी दिया था.

श्रीलंका के उत्तरी और साथ लगे इलाकों में अभी भी श्रीलंका सेना और स्वायत्तता की मांग कर रहे तमिल विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष जारी है.सेना का कहना है कि उत्तर पूर्वी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के कुछ ठिकानों को कब्ज़े में ले लिया गया है और सेना यहाँ आगे बढ़ रही है.

स्थानीय बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लोग हिंसा और सुरक्षा की चिंता के कारण ही तेज़ी से हिंसा प्रभावित इलाके को खाली करके सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं.

उधर एक मीडिया अधिकार समूह ने श्रीलंका सरकार से अनुरोध किया है कि देश के उत्तर में जहाँ संघर्ष चल रहा है, मीडिया के लोगों को आने-जाने की इजाज़त दे. यह स्थानीय और विदेशी, दोनों तरह के मीडिया के लिए कहा जा रहा है.

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