मनमोहन ही होंगे कांग्रेस के पीएम उम्मीदवार

उन्हें अगले तीन दिन सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा जाना है और कम से कम एक हफ़्ते वे अस्पताल में रहेंगे.
उन्हें अपने काम पर लौटने के लिए चार से छह हफ़्तों का समय लग सकता है.
इस बीच उनका कामकाज विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी संभालेंगे और गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उनके पारंपरिक दायित्वों का निर्वाह अलग-अलग लोग निभाएँगे.
लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री की बीमारी को लेकर जो राजनीतिक चर्चाएँ चल रही हैं उसके बाद कांग्रेस को सफ़ाई देनी पड़ी है कि पार्टी सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बारे में कोई विचार नहीं कर रही है.
राजनीतिक चर्चाएँ
पिछले मंगलवार से पहले जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दिल की बीमारी के बारे में जानकारी नहीं हुई थी तब भी कांग्रेस के भीतर यह चर्चा चल पड़ी थी कि क्या राहुल गांधी अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं?
हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि मनमोहन सिंह ही अगले प्रधानमंत्री होंगे लेकिन राहुल गांधी की उम्मीदवारी की चर्चाएँ इससे बंद नहीं हुई.
नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही अप्रासंगिक है वीरप्पा मोइली, कांग्रेस नेता
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अब मनमोहन सिंह की बाइपास सर्जरी सफल रही है लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पूरी तरह से कामकाज पर लौटने में चार से छह हफ़्तों का समय लग सकता है.
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल फिर उठने लगा है कि मार्च के बाद संभावित लोकसभा चुनावों में प्रचार का नेतृत्व क्या मनमोहन सिंह कर सकेंगे.
और इन सवालों के जवाब में शनिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली को कहना पड़ा है, "नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही अप्रासंगिक है."
बीबीसी की जिल मैकगिवरिंग का कहना है कि पाकिस्तान के साथ जिस तरह तनाव का वातावरण बना हुआ है उसके चलते मनमोहन सिंह के हाथों से बागडोर छीनने के लिए यह ठीक समय नहीं दिखता.
फ़िलहाल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गणतंत्र दिवस के परेड कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएँगे.
इसलिए फ़ैसला लिया गया है कि इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री का पारंपरिक कर्तव्य अलग-अलग लोग निभाएँ.
लेकिन इसके बाद चुनाव में सरकार का नेतृत्व मनमोहन सिंह किस तरह निभा पाएँगे यह आने वाले दिनों में उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करेगा.


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