नेताजी के अंगरक्षक ने बीते दिनों को याद किया
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ बिताए हर पल की स्मृतियां उनके एक अंगरक्षक कैप्टन शोभाराम तोकास के जेहन में आज भी ताजा हैं। नेताजी जहां कहीं भी जाते, तोकास हमेशा साये की तरह उनके साथ रहते, हर पल उनका ख्याल रखते।
तोकास (89) आज भी इस बात को स्वीकारने को तैयार नहीं हैं कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को ताईवान में रहस्यमय विमान दुर्घटना में हुई थी।
तोकास ने आईएएनएस को यहां बताया, "यह एक बड़ा धोखा है। वहां कोई विमान दुर्घटना हुआ ही नहीं। नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में नहीं हुई। वह मंचूरिया गए और फिर वहां से रूस चले गए।"
तोकास के अनुसार कैप्टन हबीबुर रहमान नेताजी के साथ उसी विमान में थे। लेकिन वह बच कर वापस आ गए। उनकी वर्दी पर खरोच तक के निशान नहीं थे। लेकिन नेताजी के बारे में बताया गया कि उनका शव पूरी तरह जल कर राख हो गया।
तोकास सवाल करते हैं, "यह कैसे संभव है कि विमान दुर्घटना में कोई व्यक्ति बगैर खरोच के वापस आ जाए।"
तोकास ने कहा कि नेताजी द्वारा गठित इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के लोग विमान दुर्घटना व नेताजी के शव के निरीक्षण के लिए ताईवान गए थे। लेकिन उन्हें इसकी स्वीकृति नहीं दी गई।
नेताजी के अंगरक्षक के रूप में अपने दिनों की याद ताजा करते हुए तोकास कहते हैं, "जब भी नेताजी मेरे सामने आते, मैं कभी उन्हें सीधी आंखों से नहीं देखता और उन्हें सलामी देता था।"
तोकास शुरू में 23 वर्ष की उम्र में 1942 में ब्रिटिश भारतीय सेना के साथ सार्जेट के रूप में जुड़े थे। उन्होंने खुफिया जानकारी इकट्ठा करने का कोर्स किया और बाद में आईएनए में शामिल हो गए। उन्हें नेताजी का अंगरक्षक बनाया गया।
तोकास कहते हैं, "नेताजी की स्मृति बहुत तेज थी। वह मुझे मेरा नाम लेकर पुकारते थे।"
आजाद हिंद फौज को संबोधित नेताजी के अंतिम शब्दों को याद करते हुए तोकास कहते हैं, "अंतिम बार जब नेताजी हम लोगों से अलग हुए, तो उन्होंने कहा कि वह एक गुप्त स्थान पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप सबका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications