'हमलावर और शिकार बने लोग बराबर नहीं'

भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि 'आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों और शिकार बने लोगों' को एक-बराबर समझने से परहेज़ करना चाहिए.उन्होंने ये भी कहा है कि मुंबई में हुए हमलों और भारत में विभिन्न जगहों पर हुए हमले 'तथाकथित कश्मीर समस्या के हल से जुड़े हुए नहीं' हैं.
समाचार एजेंसियों के अनुसार भारतीय विदेश मंत्री ने पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में भारत के बनाए लगभग 200 किलोमीटर लंबे देलाराम-जारंज राजमार्ग को अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के सुपुर्द करते वक्त व्यक्त किए.
कई बार हमें दिखता है कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों और आतंकवाद के शिकार बने लोगों को एक-बराबर माना जाता है. इस रुख़ से परहेज़ करना चाहिए विदेश मंत्री मुखर्जी
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संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में भारत और अमरीका के संबंध नई ऊँचाइयों तक पहुँचे हैं. आतंकवाद का सामना करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता होनी चाहिए. कई बार हमें दिखता है कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों और आतंकवाद के शिकार बने लोगों एक-बराबर माना जाता है. इस रुख़ से परहेज़ करना चाहिए. आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को सज़ा मिलनी चाहिए."
उनका कहना था, "सभी देशों को अपनी बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी का पालन करना चाहिए और अपनी ज़मीन से शुरु होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और ऐसे लोगों के कैंपों पर नियंत्रण पाना चाहिए."
यदि मुंबई हमलों और भारत में अन्य जगहों पर हुए ऐसे हमलों को देखें तो क्या उन्हें जम्मू-कश्मीर की तथाकथित समस्या से जोड़कर देखना ज़रूरी है? इन दोनों में संबंध नहीं है. ये विश्व में आतंकवाद का हिस्सा है विदेश मंत्री मुखर्जी
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मुंबई हमलों को कश्मीर मुद्दे से जोड़े जाने पर उनका कहना था, "यदि मुंबई हमलों और भारत में अन्य जगहों पर हुए ऐसे हमलों को देखें तो क्या उन्हें जम्मू-कश्मीर की तथाकथित समस्या से जोड़कर देखना ज़रूरी है? इन दोनों में संबंध नहीं है. ये विश्व में आतंकवाद का हिस्सा है."
विदेश मंत्री मुखर्जी ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से भी मुलाकात की और दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर भी किए.


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