'मुगल व अंग्रेजों के काल से भी बुरी है गो-वंश की स्थिति'
गो-वंश की हिफाजत के लिए प्रकोष्ठ ने जनजागरण अभियान शुरू करने का फैसला किया है। प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक राधेश्याम गुप्त ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद गो-हत्या नहीं रुक पा रही है।
उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से में गो-हत्या का दौर जारी है। घटते गो-वंश के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है। गोबर की खाद की बजाए रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के कारण भूमि बंजर होती जा रही है। आधुनिक यंत्रों के इस्तेमाल के कारण बैलों की भूमिका समाप्त हो गई है, खेती घाटे का सौदा बन गई है।
गुप्त का मानना है कि देश की पारंपरिक कृषि व्यवस्था को दुरुस्त करने, किसानों के विकास, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण कुटीर उद्योगों को विकसित करने के लिए गो पालन और गो-वंश का संवर्धन-संरक्षण जरूरी है।
गुप्त ने कहा कि गो-वंश विकास प्रकोष्ठ आने वाले समय में गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेगा। साथ ही उन्हें गो-मूत्र और गोबर के जरिए अर्थव्यवस्था दुरुस्त करने के गुर सिखाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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