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'हज़ारों विस्थापित लोग गंभीर समस्या में'

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रेडक्रॉस के अनुसार श्रीलंका में सेना-एलटीटीई संघर्ष से विस्थापित हज़ारों लोग खाद्य पदार्थों की कमी और चिकित्सा की समस्याएँ से जूझ रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेडक्रॉस के अनुसार भीषण जंग के कारण तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कब्ज़े वाले इलाक़े में फँसे हुए हज़ारों लोगों को जान बचाने के लिए बार-बार एक जगह से दूसरी जगह भटकना पड़ा है.

श्रीलंका की सेना ने पिछले कई हफ़्तों से एलटीटी के कब्ज़े वाले इलाक़ों में भीषण सैन्य अभियान चलाया है और एलटीटीई विद्रोही अब उत्तर-पूर्वी तटवर्ती शहर मुल्लईटिवू में घिर गए हैं.

रेडक्रॉस के अधिकारी पॉल कैसटेलो ने बीबीसी को बताया कि लड़ाई के कारण एक हफ़्ते से तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में राहत सामग्री नहीं पहुँच पाई है जिससे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है.

लेकिन श्रीलंका के सैन्य प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा है कि खाद्य सामग्री से लदे वाहनों का एक काफ़िला विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में भेजा गया है और वहाँ पर्याप्त खाद्य सामग्री मौजूद है.

 सुरक्षित रास्ते न होने के कारण उन मरीज़ों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो गया है जिन्हें घटनास्थल पर उचित चिकित्सा नहीं दी जा सकती और जिन्हें वावूनिया में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़े में अस्पताल में ले जाने की ज़रूरत है   एक रेडक्रॉस अधिकारी

 सुरक्षित रास्ते न होने के कारण उन मरीज़ों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो गया है जिन्हें घटनास्थल पर उचित चिकित्सा नहीं दी जा सकती और जिन्हें वावूनिया में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़े में अस्पताल में ले जाने की ज़रूरत है

'सुरक्षित रास्ते नहीं'

रेडक्रॉस ने इस विषय पर भी चिंता जताई है कि दोनों पक्षों ने आम नागरिकों के बचकर निकलने के कोई 'सुरक्षित रास्तों' पर सहमति नहीं बनाई है.

रेडक्रॉस के एक बयान में कहा गया है - "सुरक्षित रास्ते न होने के कारण उन मरीज़ों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो गया है जिन्हें घटनास्थल पर उचित चिकित्सा नहीं दी जा सकती और जिन्हें वावूनिया में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़े में अस्पताल में ले जाने की ज़रूरत है."

बुधवार को श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि कुल 1707 लोगों ने जनवरी के दो हफ़्तों में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़ों में प्रवेश किया है जहाँ उन्हें आपात मदद और राहत सामग्री दी गई.

रेडक्रॉस के अधिकारी पॉल कैसटेलो का कहना था, "बार-बार विस्थापन में कई बार लोगों को बार-बार अपने सब कुछ गँवाना पड़ा है और इसका असर साफ़ दिख रहा है."

रेडक्रॉस के अनुसार पलायन करने वाले हज़ारों लोगों को इतने छोटे से इलाक़े में रखा गया है कि उनकी सुरक्षा और हालात के बारे में गंभीर चिंता पैदा हो गई है.

 

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