• search

भारत पर कार्रवाई का बढ़ता दबाव

Subscribe to Oneindia Hindi
mumbai attacks

मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत के कूटनीतिक प्रयास रंग लाते नज़र नहीं आ रहे हैं और कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है.

लग रहा था कि भारत के कूटनीतिक दबाव के कारण पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय जगत में अलग थलग पड़ रहा है और भारत जिन तत्वों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान से कार्रवाई की उम्मीद रखता है, उस तरह की कार्रवाई पाकिस्तान को करनी पड़ सकती है.

लेकिन भारत के इस दावे को पाकिस्तान ने सिरे से ठुकराकर एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत पाकिस्तान पर जो दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, उसमें कामयाब हो रहा है या फिर हालात वही बन रहे हैं जैसे भारत की संसद पर हमले के बाद बने थे.

यानि दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँचा और फिर सब कुछ पहले जैसा हो गया.

पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी मानते हैं कि भारत के अभी तक के कूटनीतिक दबाव के कोई मायने नही हैं और भारत को कठोर और सीधी कार्रवाई का विकल्प चुनना चाहिए.

वो कहते हैं कि भारत दूसरे देशों से चाहता है कि वे पाकिस्तान पर कार्रवाई करने का दबाव बनाएँ, पर ख़ुद कोई ऐसा क़दम नहीं उठा रहा है जिससे ये संदेश जाए की भारत कठोर क़दम उठाने को तैयार है.

उनका कहना है कि भारत को कम से कम अपने राजदूत को वापस बुलाना चाहिए और ये संदेश देना चाहिए की भारत पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबध तोड़ लेगा.

 भारत को कम से कम अपने राजदूत को वापस बुलाना चाहिए और ये संदेश देना चाहिए की भारत पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबध तोड़ लेगा   जी पार्थसारथी, पूर्व राजनयिक

 भारत को कम से कम अपने राजदूत को वापस बुलाना चाहिए और ये संदेश देना चाहिए की भारत पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबध तोड़ लेगा

लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स के विदेशी मामलों के संपादक अमित बरुआ मानते हैं कि मुद्दा आतंकवाद है युद्ध नहीं.

उनके अनुसार पाकिस्तान ने बड़ी सफ़ाई से और काफ़ी हद तक कामयाबी से मुंबई के चरमपंथी हमलों के बाद आतंकवाद पर चली बहस को युद्ध की बहस में बदल दिया.

उनका मानना है कि भारत को अब भी कूटनीतिक दबाव के रास्ते पर ही चलना चाहिए और फोकस आतंकवाद पर ही होना चाहिए.

और दबाव की ज़रूरत

हालांकि पार्थसारथी मानते हैं कि भारत पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तभी बढ़ा पाएगा जब वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने की बात के बजाए, कुछ क़दम उठा कर दिखाए और उसके आगे के विकल्प भी खुले रखे यानि नौबत युद्ध की आए तो आए.

उनके अनुसार सरकार ने अभी तक ऐसी इच्छाशक्ति नही दिखाई है.

 जब तक पाकिस्तान मुंबई पर हुए हमलों के संदर्भ में भारत की मांगों पर ठोस क़दम नही उठाता है तब तक भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं होने चाहिए   अमित बरुआ, वरिष्ठ पत्रकार

 जब तक पाकिस्तान मुंबई पर हुए हमलों के संदर्भ में भारत की मांगों पर ठोस क़दम नही उठाता है तब तक भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं होने चाहिए

अमित बरुआ एक हद तक पार्थसारथी की बात का समर्थन करते हैं.

वो भी मानते हैं कि जब तक पाकिस्तान मुंबई पर हुए हमलों के संदर्भ में भारत की मांगों पर ठोस क़दम नही उठाता है तब तक भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं होने चाहिए.

यहां तक कि भारत पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबध भी तोड़ ले.

लेकिन वो मानते हैं कि युद्ध कम से कम अभी की सूरत में भारत के लिए सही विकल्प नहीं है पर कहते हैं कि पाकिस्तान को भी समझना होगा कि अगर उसने अपनी ज़मीन से भारत पर होने वाले हमले नहीं रोके तो सरकार सीधी कार्रवाई करने के दबाव को ज़्यादा नहीं टाल पाएगी.

अमित बरुआ कहते हैं कि उनकी ये राय अभी के हालात में है, लेकिन अगर भारत पर कोई और चरमपंथी हमला हो जाता है, तो कहना मुश्किल होगा की भारत सरकार क्या विकल्प चुनेगी.

वो कहते हैं कि हमें ये नही भूलना चाहिए कि भारत में मुंबई हमला अकेला हमला नहीं हुआ है, उससे पहले भी कई हमले हुए हैं और देश में भारी गुस्सा है और अगर ये हमले नहीं रूकते तो फिर सरकार सीधी कार्रवाई के दबाव को कितना झेल पाएगी, कहना मुश्किल है.

कुल मिलाकर भारत में इस बात पर अब भी बहस चल रही है कि मुंबई पर हुए हमलों के बाद पाकिस्तान के साथ किस तरह के संबंध रखे जाएं, कूटनीतिक दबाव के रास्ते पर चला जाए या फिर सीधी कार्रवाई का विकल्प चुना जाए.

लेकिन एक बात कही जा सकती है कि वो लोग भी जो अभी तक सीधी कार्रवाई के विकल्प से बचने की बात करते रहे हैं, वो भी पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए भारत के क़दमों को सख़्त करने की बात कहने लगे हैं.

ऐसे लोग भी कूटनीतिक संबंध तोड़ने को सही ठहरा रहे हैं और कहने लगे हैं कि अगर पाकिस्तान का रवैया यही रहता है तो सीधी कार्रवाई का दबाव सरकार ज़्यादा दिन नहीं झेल पाएगी.

 

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more