हाई कोर्ट ने रद्द किया मायावती का आदेश

हाई कोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बना रही है। राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल देवेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।
भर्तियां रद्द किये जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ निलंबित आईपीएस अफसर ब्रजभूषण बक्शी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायामूर्ति एएन वर्मा और न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला ने भर्ती घोटाले की जांच करने वाली कमेटी के प्रमुख आईपीएस अफसर शैलजाकांत मिश्रा का कमेटी में होना अनुचित बताते हुए कहा कि शैलजाकांत मिश्रा पुलिस भर्ती के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (स्टैबलिशमेंट) थे।
न्यायालय ने कहा कि जब शैलजाकांत खुद उस भर्ती प्रकिया का हिस्सा थे तो उन्हें जांच कमेटी का प्रमुख बनाया जाना उचित नहीं था। न्यायालय ने कमेटी को रद्द करने का आदेश दिया है।
इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 8 दिसंबर, 2008 को बर्खास्त सिपाहियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को उन्हें बहाल करना का आदेश दिया था। न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ही विशेष अपील दायर की थी, जिस पर अभी फैसला आना बाकी है।
गौरतलब है कि मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में करीब 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई थी, जिसमें घोटाला उजागर होने के बाद भर्तियां रद्द कर दी गईं।
साथ ही मायावती सरकार ने जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। यही वो समिति है जिसकी सिफारिश पर मायावती ने 18,000 से पुलिस कर्मियों को बर्खास्त और 34 आईपीएस अफसरों को निलंबित कर दिया गया था।


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