शिबू सोरेन पर इस्तीफ़े का दबाव

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन पर इस्तीफ़े का दबाव बढ़ गया है. ऐसे संकेत हैं कि सोमवार को शिबू सोरेन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे सकते हैं. हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है और न ही रविवार तक मुख्यमंत्री की ओर से राजभवन से मिलने का समय लिया गया है.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं लेकिन इस पर अब तक सहमति नहीं हो पाई है.
मुख्यमंत्री को लेकर राजधानी राँची में बैठकों का सिलसिला रविवार को चलता रहा.
शिबू सोरेन कांग्रेस, लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे.
आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री का फ़ैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा की बैठक में नहीं तय हो सकता है, ये यूपीए की बैठक में तय होगा.
दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन विधानसभा उपचुनाव में हार गए थे.
तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से उन्हें झारखंड पार्टी के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण पतार ने नौ हज़ार से ज़्यादा मतों से हरा दिया था.
शिबू सोरेन के लिए ये ज़बरदस्त झटका माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद छह महीनों के भीतर उन्हें विधानसभा का सदस्य बनना ज़रूरी है.
सत्ता का गणित
पिछले साल 27 अगस्त काफ़ी उलटफेर के बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 23 महीने पुरानी कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेते हुए ख़ुद सरकार बनाने का दावा पेश किया था.
झारखंड के मुख्यमंत्री का फ़ैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा की बैठक में नहीं तय हो सकता है, ये यूपीए की बैठक में तय होगा गौतम सागर राना, आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष
| |
काफ़ी उठा-पटक के बाद शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की सहमति बनी और निर्दलीय विधायकों ने आख़िरकार उन्हें समर्थन दिया.
लेकिन अब विधानसभा उप चुनाव में हार के बाद झारखंड की राजनीतिक स्थिति नई करवट ले सकती है. जानकारों का मानना है कि सोरेन को अपना पद छोड़ना पड़ सकता है.
नई स्थिति में एक बार फिर मधु कोड़ा के मुख्यमंत्री बनने की भी संभावना जताई जा रही है क्योंकि कांग्रेस के बड़े गुट का समर्थन अब भी उन्हें हासिल है. साथ में निर्दलीय विधायक भी उनके साथ हैं.
यह भी माना जा रहा है कि ज़्यादा उठा-पटक हुई जो राष्ट्रपति शासन भी एक विकल्प हो सकता है.
झारखंड की 82 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 17 विधायक हैं. कांग्रेस के नौ और राष्ट्रीय जनता दल के सात विधायक हैं.
एएजेएसयू के दो, फॉरवर्ड ब्लाक के दो, यूएनजीडीपी के दो, जेकेपी और भाकपा माले के एक-एक और पांच निर्दलीय सदस्य हैं.
दूसरी ओर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के 29 विधायक हैं. जनता दल-यूनाइटेड के चार विधायक हैं. और अब तमाड़ सीट झारखंड पार्टी के खाते में चली गई है.


Click it and Unblock the Notifications