ऊर्जा क्षेत्र बन सकता है निशाना: प्रणब

पिछले साल 26 से 29 नवंबर तक मुंबई में चले आतंकवादी तांडव के संदर्भ में मुखर्जी ने कहा, "इस अक्षम्य हमले से विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था के सामने व्याप्त खतरे का संकेत मिलता है। भले ही इस हमले को किसी राज्य या तथाकथित सरकार के नियंत्रण से परे किसी संगठन (नॉन स्टेट एक्टर्स) ने अंजाम दिया हो।"
राजधानी में आठवीं अंतर्राष्ट्रीय तेल व गैस प्रदर्शनी 'पेट्रोटेक 2009' के उद्घाटन अवसर पर मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के सामने खतरे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्रीय हित में ऊर्जा सुरक्षा की चिंता केंद्रीय है और यह हमारी आर्थिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।" उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी विश्व बिरादरी की होनी चाहिए।
मुखर्जी ने कहा, "इन संपत्तियों की सुरक्षा किसी एक देश या तेल निर्यातक या उपभोक्ता देश की केवल कानून व व्यवस्था का मामला नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति में स्थायित्व, ऊर्जा परिवहन की सुरक्षा और नई ऊर्जा आधारभूत संरचनाओं का निर्माण एक सामान्य वैश्विक लक्ष्य होना चाहिए। इसे हासिल करने के लिए सभी देशों के बीच सहयोग और संयोजन की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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