नेपाल में अब 16 घंटे बिजली कटौती

पिछले महीने ही नेपाल में माओवादियों के नेतृत्व में चल रही सरकार ने बिजली को लेकर आपातकाल की घोषणा की थी और उसके बाद से प्रतिदिन 12 घंटों की कटौती हो रही थी.
अधिकारियों का कहना है कि चूंकि बर्फ़ ठीक तरह से नहीं पिघल रही है इसलिए नदियों में पर्याप्त पानी नहीं आ पा रहा है. इससे बिजली पैदा करने में कठिनाई हो रही है.
बिजली की इस कटौती का नेपाल की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है जो पहले से ही संकट में है.
नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) के ऑपरेशन डायरेक्टर ने बीबीसी से कहा कि पिछले साल फ़रवरी के मध्य से कटौती में बढ़ोत्तरी करनी पड़ी क्योंकि मांग बढ़ती गई और उत्पादन की स्थिति गंभीर बनी रही.
नेपाल के निजी टेलीविज़न चैनलों ने गुरुवार को कहा था कि बिजली में कटौती की वजह से वे अपना प्रसारण पाँच घंटे प्रतिदिन तक सीमित कर रहे हैं.
कई बरसों गृहयुद्ध की स्थिति झेलने के बाद संभलने की कोशिश कर रही अर्थव्यवस्था पर भी इस कटौती का बुरा असर पड़ रहा है. उद्योगपतियों और व्यावसायियों ने कहा है कि इसकी वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई है.
नेपाल में इस समय एनईए 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है जबकि मांग 800 मेगावाट की है और इसमें हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो रही है.
हालांकि नेपाल पड़ोसी देश भारत से कुछ बिजली ख़रीदता है लेकिन वह इस कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती.


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