• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

रीढ़ को लचीला बनाता है मेरुदंड आसन

By Staff
|
रीढ़ को लचीला बनाता है मेरुदंड आसन

योगासन के बाद प्राणायाम का अभ्यास भी करना चाहिए. कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से पेट के सभी विकार दूर होते हैं. तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है.

कपालभाति प्राणायाम बहिर्मुखी भी बनाता है. शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और ये प्राणायाम अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक है. शरीर के दूषित पदार्थ निकल जाते हैं और प्राण शक्ति का स्तर बढ़ता है.

विधि

दोहरा कंबल बिछाएँ और पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएँ. मेरुदंड आसन करने के लिए दोनों घुटनों को मोड़ें और तलवों को ज़मीन से लगाकर नितंब के पास रखें.

दोनों पैरों में लगभग डेढ़ फुट का फासला होना चाहिए.

दाएँ हाथ से दाएँ पैर का अँगूठा पकड़ें और बाएँ पैर से बाएँ पैर का अँगूठा. यह प्रारंभिक स्थिति है.

थोड़ा पीछे झुकें, संतुलन बनाएँ और पैरों को सीधा करते जाएँ. पैरों का अँगूठा पकड़कर रखें. इस स्थिति में दोनों पैर ज़मीन के ऊपर उठे रहेंगे अब पैरों को आपस में मिला लें. पाँच सेकंड तक सांस रोककर इस स्थिति में रुकिए.

वापस आने के लिए घुटने मोड़ते हुए पैरों को ज़मीन पर लाएँ और सांस को सामान्य कर लें. इसे तीन बार दोहराएँ.

जिन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, स्लिप डिस्क या श्याटिका के दर्द की शिकायत हो, उन्हें मेरुदंड आसन के अभ्यास से बचना चाहिए.

मेरुदंड आसन पेट के सभी अंगों को अधिक सक्षम बनाता है. ये लीवर और पेट की मांसपेशियों को सशक्त करता है और कब्ज की समस्या से आराम दिलाता है.

इसके नियमित अभ्यास से कमर, पीठ और गर्दन की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं. रीढ़ के सभी जोड़ मज़बूत होते हैं.

इसके अलावा ये आसन तंत्रिका तंत्र को अधिक सक्षम बनाने में सहायक है.

कपालभाति प्राणायाम

पदमासन में बैठें और रीढ़ को भी सीधा रखें. दोनों हाथ घुटनों पर रखें. चिन्न मुद्रा में यानी अँगूठा और पहली उंगली के अग्र भाग को मिला लें.

थोड़ी देर के लिए आँखें बंद करें और अपना ध्यान साँस की ओर लगाएँ और शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें.

मेरुदंड आसन पेट के सभी अंगों को अधिक सक्षम बनाता है

मन शांत होने के बाद आँखें खोलें और कपालभाति प्राणायाम करने के लिए दोनों नथुनों से सामान्य साँस लें और तेज़ गति से साँस को बाहर निकाल दें.

साँस भरते हुए पेट फूलना चाहिए न कि छाती. साँस छोड़ते हुए नाभि और पेट की माँसपेशियों को अंदर की ओर खींचें ताकि बची हुई साँस भी बाहर निकल जाए.

पहले राउंड में 10 बार साँस भरें और बिना रुके पूरी साँस तेज़ गति से बाहर निकाल दीजिए.

ऐसा करने के बाद अंत में साँस सामान्य कर लें यानी गहरी साँस भरें और साँस निकालकर शरीर को ढीला छोड़ दें. इस प्रक्रिया को तीन से पाँच बार दोहराएँ.

सावधानी

जो हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मिर्गी, वर्टिगो, हार्निया या गैस्ट्रिक अल्सर से पीड़ित हैं, उन्हें योग शिक्षक की सलाह के बाद ही ये प्राणायाम करना चाहिए.

कपालभाति प्राणायाम करते हुए पेट पूरी तरह खाली होना चाहिए. भोजन करने के तीन या चार घंटे बाद ही प्राणायाम करना चाहिए.

कपालभाति प्राणायाम मानसिक तनाव को घटाता है. इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है. सुस्ती और आलस दूर होता है. प्राणायाम के अभ्यास से जठराग्नि यानी पाचन शक्ति बढ़ती है.

पेट के सभी अंगों की कार्यक्षमता बढ़ती है. अतिरिक्त चर्बी घटती है. कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से फेफड़ों में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा कम होती है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more