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गिरफ़्तारियों के बावजूद ट्रक हड़ताल जारी

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truk strike

आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की ग़िरफ़्तारी के बावज़ूद भारत में ट्रांसपोर्टरों की बेमियादी हड़ताल शनिवार को छठे दिन भी जारी है.

एआईएमटीसी के उपाध्यक्ष अमोलक सिंह ने समाचार एजेंसियों को बताया कि हड़ताल के कारण कारोबार में भारी घाटा हो रहा है लेकिन सरकार जब तक उनकी माँगों पर विचार नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी.

ग़िरफ़्तार होने से पहले ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा ने बीबीसी को बताया था कि उन्होंने सरकार के सामने डीज़ल की क़ीमत प्रति लीटर 10 रुपए कम करने और टायरों के दाम में 35 प्रतिशत कमी की माँग रखी है.

केंद्रीय परिवहन मंत्री टीआर बालू ने हड़ताली ट्रांसपोर्टरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की घोषणा की है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार पाँच राज्य - दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश ने अनिवार्य सेवा कानून यानी एस्मा लागू किया है.

हड़ताल को धक्का

हड़ताल के कारण कारोबार में भारी घाटा हो रहा है, लेकिन सरकार जब तक हमारी माँगों पर विचार नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी अमोलक सिंह, उपाध्यक्ष, एआईएमटीसी

हड़ताल के कारण कारोबार में भारी घाटा हो रहा है, लेकिन सरकार जब तक हमारी माँगों पर विचार नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी

एआईएमटीसी को कल उस समय धक्का लगा जब उसके अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा और सचिव एस वेणुगोपाल समेत तीस अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने अनिवार्य सेवा कानून यानी एस्मा के तहत ग़िरफ़्तार कर लिया.

सरकार के इस कदम के बाद ट्रांसपोर्टरों ने और कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि ग़िरफ़्तार किए गए नेताओं को बिना शर्त रिहा किए जाने तक सरकार के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी.

इस बीच देशभर में ज़रूरी चीजों को आपूर्ति पर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है.

सरकार घोषणा कर चुकी है कि ज़रूरी वस्तुओं और ख़ासतौर पर खाद्य सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वह 15-20 लाख़ वाहनों को सड़कों पर उतारने की योजना बना रही है.

गृहमंत्री पी चिदंबरम कह चुके हैं कि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल लोगों के हितों के ख़िलाफ़ है. उन्होंने कहा है कि ट्रांसपोर्टरों की ज़्यादातर माँगें राज्य सरकारों से संबंधित हैं, इसलिए संकट के समाधान के लिए केंद्र राज्यों के संपर्क में है.

इस बीच ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल को "ग़ैर कानूनी" घोषित करने की माँग के साथ शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है.

याचिका पर सुनवाई के लिए 12 जनवरी की तिथि तय की गई है.

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